दतिया में एक साल की बच्ची की मौत:उल्टी-दस्त का इलाज चल रहा था, परिजन बिना डिस्चार्ज घर ले गए

दतिया में एक साल की बच्ची की मौत:उल्टी-दस्त का इलाज चल रहा था, परिजन बिना डिस्चार्ज घर ले गए

दतिया में उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद एक साल की बच्ची की मौत हो गई। बच्ची का नाम नीलू आदिवासी है वह उदगंवा क्षेत्र के सलैया पमार आदिवासी डेरा की रहने वाली थी। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे पीआईसीयू में रखा गया। कुछ दिन के इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ था। इसके बाद परिजन उसे बिना डिस्चार्ज कराए घर ले गए। सोमवार शाम करीब 4 बजे बच्ची ने घर पर ही दम तोड़ दिया। नीलू के पिता धर्मेंद्र आदिवासी ने बताया कि बच्ची को अचानक उल्टी-दस्त हुए थे। उसी शाम वह उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बच्ची को पीआईसीयू में भर्ती किया था। कुछ दिन के इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार होने लगा था। धर्मेंद्र ने बताया कि इलाज के दौरान वह दोबारा अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को बताया कि वह अपनी बेटी को घर ले जा रहे हैं। इसके बाद बिना डिस्चार्ज कराए ही बच्ची को घर लेकर चले गए। उसी शाम उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई, लेकिन उसे अस्पताल नहीं ला सके। कुछ समय बाद बच्ची की मौत हो गई। दस्तक अभियान के बीच गांव में नहीं पहुंची स्वास्थ्य टीम बच्ची की मौत ऐसे समय हुई है, जब जिले में दस्तक अभियान चल रहा है। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में इलाज की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। उपस्वास्थ्य केंद्र ज्यादातर समय बंद रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक, सीएचओ ग्वालियर से आती हैं और कई बार जल्दी वापस चली जाती हैं। ऐसे में लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इलाज के लिए दतिया जाने को मजबूर ग्रामीण ग्रामीणों के मुताबिक, उपस्वास्थ्य केंद्र कभी-कभार ही खुलता है। इलाज के लिए उन्हें दतिया जाना पड़ता है। बच्ची की मौत के बाद गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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