पहली बारिश में मोहनिया सिविल कोर्ट बना तालाब:नाले का गंदा पानी परिसर में भरा; अधिवक्ता बोले- कागजों तक सीमित विकास

पहली बारिश में मोहनिया सिविल कोर्ट बना तालाब:नाले का गंदा पानी परिसर में भरा; अधिवक्ता बोले- कागजों तक सीमित विकास

मानसून की पहली बारिश ने मोहनिया स्थित व्यवहार न्यायालय यानी सिविल कोर्ट परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश के बाद कोर्ट परिसर और संपर्क मार्ग पर भीषण जलभराव हो गया। नालों की समुचित सफाई नहीं होने और जलनिकासी की खराब व्यवस्था के कारण नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर न्यायालय परिसर, मुख्य रास्तों और अधिवक्ताओं के बैठने की जगह तक पहुंच गया। स्थिति ऐसी हो गई कि कोर्ट में अपने मुकदमों की पैरवी के लिए पहुंचे अधिवक्ताओं, मुवक्किलों और आम लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। कई जगह पानी इतना अधिक जमा था कि लोगों को आने-जाने में भी परेशानी हुई। नाले का गंदा पानी कोर्ट परिसर में घुसा स्थानीय अधिवक्ताओं के अनुसार भभुआ रोड से कोर्ट परिसर की ओर आने वाले नाले के निर्माण में तकनीकी खामी है। बारिश के दौरान नाले का पानी आगे निकलने के बजाय कोर्ट परिसर की ओर बहने लगता है। पहली ही बारिश में नाला ओवरफ्लो हो गया और गंदा पानी कचहरी परिसर में जमा हो गया। कोर्ट के मुख्य रास्तों के साथ-साथ अधिवक्ताओं के बैठने की जगह भी जलमग्न हो गई। तख्त-कुर्सी और वाहन पानी में डूबे जलभराव के कारण अधिवक्ताओं के तख्त और कुर्सियां गंदे पानी में डूब गईं। कई अधिवक्ताओं के वाहन भी पानी से घिर गए। इसके बावजूद न्यायिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए अधिवक्ता गंदे पानी के बीच बैठकर अपना काम निपटाने को मजबूर रहे। मुवक्किलों को भी अपने अधिवक्ताओं से मिलने और न्यायालय से जुड़े काम के लिए पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इससे लोगों में नगर पंचायत और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। बीमारी फैलने का भी बढ़ा खतरा अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट परिसर में लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से डेंगू, मलेरिया और चर्म रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी है। न्यायालय परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कर्मचारी, मुवक्किल और आम लोग पहुंचते हैं। ऐसे में जलभराव की समस्या सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला भी है। ‘विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित’ अधिवक्ता उदय प्रताप सिंह और राकेश कुमार ने नगर पंचायत प्रशासन के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की बात तो लगातार होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। अधिवक्ताओं ने कहा कि कचहरी परिसर में न तो जलनिकासी की उचित व्यवस्था है और न ही शुद्ध पेयजल का समुचित प्रबंध। बारिश होते ही जलभराव की समस्या सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि नाले की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त कर दी जाती तो पहली बारिश में यह स्थिति पैदा नहीं होती। स्थायी समाधान की मांग अधिवक्ताओं ने जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से कोर्ट परिसर में जमा पानी की तत्काल निकासी कराने की मांग की है। साथ ही भभुआ रोड से कोर्ट परिसर तक आने वाले नाले की तकनीकी जांच कराकर उसकी मरम्मत और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग उठाई गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या सामने आती है। अस्थायी रूप से पानी निकालने के बजाय प्रशासन को नाले की संरचना और निकासी व्यवस्था की खामियों को दूर करना चाहिए। बारिश ने खोल दी व्यवस्था की पोल मानसून की पहली बारिश ने मोहनिया व्यवहार न्यायालय परिसर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्याय का काम सुचारु रूप से चलाने वाले अधिवक्ता और यहां आने वाले आम लोग ही गंदे पानी से जूझने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कोर्ट परिसर को जलभराव से स्थायी रूप से निजात दिलाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है। मानसून की पहली बारिश ने मोहनिया स्थित व्यवहार न्यायालय यानी सिविल कोर्ट परिसर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश के बाद कोर्ट परिसर और संपर्क मार्ग पर भीषण जलभराव हो गया। नालों की समुचित सफाई नहीं होने और जलनिकासी की खराब व्यवस्था के कारण नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर न्यायालय परिसर, मुख्य रास्तों और अधिवक्ताओं के बैठने की जगह तक पहुंच गया। स्थिति ऐसी हो गई कि कोर्ट में अपने मुकदमों की पैरवी के लिए पहुंचे अधिवक्ताओं, मुवक्किलों और आम लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। कई जगह पानी इतना अधिक जमा था कि लोगों को आने-जाने में भी परेशानी हुई। नाले का गंदा पानी कोर्ट परिसर में घुसा स्थानीय अधिवक्ताओं के अनुसार भभुआ रोड से कोर्ट परिसर की ओर आने वाले नाले के निर्माण में तकनीकी खामी है। बारिश के दौरान नाले का पानी आगे निकलने के बजाय कोर्ट परिसर की ओर बहने लगता है। पहली ही बारिश में नाला ओवरफ्लो हो गया और गंदा पानी कचहरी परिसर में जमा हो गया। कोर्ट के मुख्य रास्तों के साथ-साथ अधिवक्ताओं के बैठने की जगह भी जलमग्न हो गई। तख्त-कुर्सी और वाहन पानी में डूबे जलभराव के कारण अधिवक्ताओं के तख्त और कुर्सियां गंदे पानी में डूब गईं। कई अधिवक्ताओं के वाहन भी पानी से घिर गए। इसके बावजूद न्यायिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए अधिवक्ता गंदे पानी के बीच बैठकर अपना काम निपटाने को मजबूर रहे। मुवक्किलों को भी अपने अधिवक्ताओं से मिलने और न्यायालय से जुड़े काम के लिए पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इससे लोगों में नगर पंचायत और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। बीमारी फैलने का भी बढ़ा खतरा अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट परिसर में लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से डेंगू, मलेरिया और चर्म रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी है। न्यायालय परिसर में रोजाना बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कर्मचारी, मुवक्किल और आम लोग पहुंचते हैं। ऐसे में जलभराव की समस्या सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला भी है। ‘विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित’ अधिवक्ता उदय प्रताप सिंह और राकेश कुमार ने नगर पंचायत प्रशासन के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की बात तो लगातार होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। अधिवक्ताओं ने कहा कि कचहरी परिसर में न तो जलनिकासी की उचित व्यवस्था है और न ही शुद्ध पेयजल का समुचित प्रबंध। बारिश होते ही जलभराव की समस्या सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि नाले की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त कर दी जाती तो पहली बारिश में यह स्थिति पैदा नहीं होती। स्थायी समाधान की मांग अधिवक्ताओं ने जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से कोर्ट परिसर में जमा पानी की तत्काल निकासी कराने की मांग की है। साथ ही भभुआ रोड से कोर्ट परिसर तक आने वाले नाले की तकनीकी जांच कराकर उसकी मरम्मत और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग उठाई गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या सामने आती है। अस्थायी रूप से पानी निकालने के बजाय प्रशासन को नाले की संरचना और निकासी व्यवस्था की खामियों को दूर करना चाहिए। बारिश ने खोल दी व्यवस्था की पोल मानसून की पहली बारिश ने मोहनिया व्यवहार न्यायालय परिसर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्याय का काम सुचारु रूप से चलाने वाले अधिवक्ता और यहां आने वाले आम लोग ही गंदे पानी से जूझने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कोर्ट परिसर को जलभराव से स्थायी रूप से निजात दिलाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।  

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