शेखपुरा में संत शिरोमणि रविदास की जयंती मंगलवार को जिला प्रशासन द्वारा समरसता समाज निर्माण के रूप में मनाई गई। उनकी 650वीं जयंती के अवसर पर नगर क्षेत्र में एक विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी भाग लिया। यह यात्रा नगर क्षेत्र के ऐतिहासिक अरघौती पोखर परिसर से पूरे धूमधाम के साथ निकाली गई। सक्रिय रूप से कलश यात्रा में भाग लिया कलश यात्रा ने नगर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों जैसे गोल्डन चौक, बुधौली चौक और लाइन होटल का भ्रमण किया। लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह अरघौती पोखर के पास ही समाप्त हुई। जिला प्रशासन ने इस आयोजन के लिए एक जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया था, जिसके महिला और पुरुष सदस्यों ने भी कलश यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना उधर, जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी संत शिरोमणि रविदास की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया और उनकी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान लोगों के बीच महाप्रसाद का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम स्थलों को कृत्रिम रोशनियों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। शेखपुरा में संत शिरोमणि रविदास की जयंती मंगलवार को जिला प्रशासन द्वारा समरसता समाज निर्माण के रूप में मनाई गई। उनकी 650वीं जयंती के अवसर पर नगर क्षेत्र में एक विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी भाग लिया। यह यात्रा नगर क्षेत्र के ऐतिहासिक अरघौती पोखर परिसर से पूरे धूमधाम के साथ निकाली गई। सक्रिय रूप से कलश यात्रा में भाग लिया कलश यात्रा ने नगर क्षेत्र के विभिन्न इलाकों जैसे गोल्डन चौक, बुधौली चौक और लाइन होटल का भ्रमण किया। लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह अरघौती पोखर के पास ही समाप्त हुई। जिला प्रशासन ने इस आयोजन के लिए एक जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया था, जिसके महिला और पुरुष सदस्यों ने भी कलश यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना उधर, जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी संत शिरोमणि रविदास की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया और उनकी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान लोगों के बीच महाप्रसाद का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम स्थलों को कृत्रिम रोशनियों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

