Hair Loss Diseases: बालों का झड़ना हमेशा सिर्फ बालों की देखभाल में कमी या मौसम बदलने की वजह से नहीं होता। कई बार शरीर में होने वाली कुछ बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हेयर फॉल का कारण बन सकती हैं। अचानक बहुत ज्यादा बाल झड़ना, बालों का तेजी से पतला होना या सिर पर जगह जगह से बाल कम होना किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक हेयर फॉल को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी वजह जानना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी 10 बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के बारे में, जिनसे हेयर फॉल या हेयर लॉस हो सकता है।
थायरॉइड
थायरॉइड हार्मोन में बदलाव का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है और इसमें बालों का झड़ना भी शामिल है। Mayo Clinic के अनुसार थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं हेयर लॉस से जुड़ी हो सकती हैं। थायरॉइड की समस्या का सही इलाज होने के बाद कई मामलों में बालों का झड़ना कम हो सकता है।
एलोपेसिया एरियाटा
एलोपेसिया एरियाटा एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बालों के रोम पर असर डालती है। इसके कारण सिर की त्वचा पर अचानक गोल या पैच के रूप में बाल झड़ सकते हैं। कुछ लोगों में एक या कई जगहों पर बाल पूरी तरह भी झड़ सकते हैं।
स्कैल्प रिंगवर्म या टिनिया कैपिटिस
स्कैल्प रिंगवर्म एक फंगल इंफेक्शन है, जो सिर की त्वचा और बालों को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण सिर पर पपड़ी, खुजली, लालिमा और सूजन के साथ बाल टूटने या झड़ने की समस्या हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर हेयर लॉस बढ़ सकता है।
ल्यूपस
ल्यूपस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो शरीर के अलग अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। इसमें कुछ लोगों को बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है। अगर बाल झड़ने के साथ शरीर में अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
डायबिटीज
डायबिटीज को भी कुछ मामलों में हेयर लॉस से जुड़ा हुआ माना जाता है। हालांकि बाल झड़ने के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल हेयर फॉल के आधार पर डायबिटीज का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। लगातार या अचानक बाल झड़ने पर इसकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
हाशिमोटो डिजीज
हाशिमोटो डिजीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो थायरॉइड ग्लैंड को प्रभावित करती है। इसमें थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो सकता है और इसके लक्षणों में बालों का झड़ना भी शामिल हो सकता है। बीमारी का सही इलाज और हार्मोन का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, PCOS में हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं और कुछ महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। इसके कारण सिर के बाल पतले होने या पुरुषों जैसे पैटर्न में हेयर लॉस की समस्या हो सकती है। हालांकि PCOS में हर महिला को हेयर लॉस की समस्या हो, यह जरूरी नहीं है।
स्कैल्प सोरायसिस
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, स्कैल्प सोरायसिस में सिर की त्वचा पर मोटे और पपड़ीदार पैच बन सकते हैं। इसमें खुजली और जलन की समस्या भी हो सकती है। प्रभावित हिस्से को बार बार खुजलाने या पपड़ी हटाने से बाल टूट या झड़ सकते हैं। इसलिए स्कैल्प सोरायसिस के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
ट्राइकोटिलोमेनिया
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ट्राइकोटिलोमेनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अपने बाल खींचने की बार बार तेज इच्छा होती है। लगातार बाल खींचने से सिर के कुछ हिस्सों में बाल कम हो सकते हैं और हेयर लॉस दिखाई दे सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बालों के रोम को नुकसान पहुंचने का खतरा भी हो सकता है।
एनीमिया
आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया शरीर में आयरन की कमी से जुड़ा होता है और पोषण संबंधी कमी को हेयर लॉस से जोड़ा जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में एनीमिया के कारण बाल झड़ें, यह जरूरी नहीं है। लगातार बाल झड़ने की स्थिति में डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून की जांच कराकर इसकी वजह का पता लगा सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

