उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती परीक्षा-2025 में आरक्षण एवं मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी के निर्धारण को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग से स्पष्टीकरण हलफनामा मांगा है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने पंकज कुमार वर्मा व अन्य की याचिका पर आयोग द्वारा दाखिल हलफनामे को पूर्व में दिए गए निर्देश का पूर्ण अनुपालन नहीं माना। कोर्ट ने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट सूची तैयार करते समय सामान्य श्रेणी में केवल अनारक्षित अभ्यर्थियों को रखा गया था अथवा आरक्षित एवं अनारक्षित दोनों वर्गों के अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर रख सूची तैयार की गई थी। जानिये क्या उठे सवाल याचिका में 321ओ बी सी , 131 ई डब्ल्यू एस और 43 एस सी श्रेणी अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में मेरिट के कारण शामिल करने पर सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट के समक्ष आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि अंतिम चयन के समय नियमों के अनुसार मेरिट के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में माइग्रेट किया जाएगा और मेरिट सूची तैयार की जायेगी। आयोग ने यह भी बताया कि अंतिम अंतिम सामान्य श्रेणी अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 321 ओ बी सी, 131 ई डब्ल्यू एस तथा 43 एस सी श्रेणी अभ्यर्थी पाये गये हैं। आयोग के अनुसार इन अभ्यर्थियों को अंतिम चयन के समय संबंधित विज्ञापन एवं नियमों के अनुसार अनारक्षित श्रेणी यानि सामान्य श्रेणी में माइग्रेट किया जाएगा। आयोग बेहतर व स्पष्ट हलफनामा दाखिल करे हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि यदि ये अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी के अंतिम अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त कर चुके हैं, तो क्या प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर ही उन्हें सामान्य श्रेणी में रखा गया है अथवा वे अभी भी अपनी-अपनी आरक्षित श्रेणी में ही रखे गए हैं। आयोग को बेहतर एवं स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। आयोग को विशेष रूप से यह बताना होगा कि: 321 ओ बी सी और 43 एस सी श्रेणी अभ्यर्थियों, जिन्होंने अंतिम सामान्य श्रेणी अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, को किस श्रेणी में रखा गया है। क्या इन अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में रखा गया है अथवा उनकी संबंधित आरक्षित श्रेणी में। प्रारंभिक परीक्षा के बाद सामान्य श्रेणी की सूची किस आधार पर तैयार की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अपनी मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीट पर चयन का हकदार है, तो उसे आरक्षित कोटे में समायोजित नहीं किया जा सकता।

