भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और उसके जरूरी पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना के पांचवें चरण के तहत 7,877 करोड़ रुपये के निवेश वाले 31 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से देश में करीब 82,243 करोड़ रुपये के उत्पादन की क्षमता तैयार होने की उम्मीद है।
बता दें कि इन मंजूर परियोजनाओं में मुद्रित सर्किट बोर्ड, कैमरा मॉड्यूल, प्रदर्शन मॉड्यूल, जोड़ने वाले पुर्जे, दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक, ध्वनि उपकरण और दूसरे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जों का उत्पादन शामिल है। इसका मकसद देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया है कि इस योजना के लिए लगातार आवेदन मिल रहे हैं और यह सरकार की तेजी से आगे बढ़ने वाली विनिर्माण योजनाओं में शामिल हो गई है। गौरतलब है कि मंजूरी मिलने के बाद कई परियोजनाओं के जल्द उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, केन्स टेक्नोलॉजी की मुद्रित सर्किट बोर्ड इकाई करीब एक महीने में शुरू हो सकती है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज की मंजूर परियोजना के लगभग चार महीने में चालू होने की उम्मीद है। वहीं, मदरसन की कांचीपुरम इकाई और विप्रो का संयंत्र अगले दो से तीन महीने में उत्पादन शुरू कर सकते हैं। कई अन्य परियोजनाओं के भी अगले छह महीने के भीतर चालू होने की संभावना है।
पांचवें चरण में विप्रो को तांबे की परत वाले लैमिनेट के लिए 1,033 करोड़ रुपये और ज्योति सीएनसी को मशीन निर्माण से जुड़े सामान के लिए 1,021 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी मिली है। माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मोल्डिंग को इकाई के बाहरी ढांचे के निर्माण के लिए 565 करोड़ रुपये और क्वांटम मैग्नेटिक्स को दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक के लिए 400 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।
आरपीएसजी समूह की पीसीबीएल केमिकल को एसीटिलीन ब्लैक के निर्माण के लिए 329 करोड़ रुपये और अक्यूटास केमिकल्स को बैटरी में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रोलाइट पदार्थों के लिए 119 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। मिंडा इंस्ट्रूमेंट को प्रदर्शन मॉड्यूल के लिए 270 करोड़ रुपये, वीडीएन टेक्नोलॉजीज को 100 करोड़ रुपये और जापान की मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक को 99 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी मिली है। सिरमा एसजीएस को कुंडली निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये और सेंटम को 50 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।
इस बीच, जीएक्स समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संस्थापक पारितोष प्रजापति ने कहा है कि भारत की विनिर्माण क्षमता को नीदरलैंड की तकनीक और विशेषज्ञता के साथ जोड़कर देश और वैश्विक बाजारों के लिए उन्नत उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
गौरतलब है कि पांचवें चरण की मंजूरियों के बाद योजना के तहत स्वीकृत कुल निवेश करीब 69,500 करोड़ रुपये हो गया है, जो सरकार के 59,000 करोड़ रुपये के शुरुआती लक्ष्य से काफी अधिक है। इसी तरह स्वीकृत उत्पादन भी 5.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि शुरुआती लक्ष्य 4.56 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में घरेलू उत्पादन, रोजगार और निजी निवेश को और गति मिलेगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

