ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में 50 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक:सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी भक्तों की भीड़, 1KM लंबी लाइन

ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में 50 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक:सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी भक्तों की भीड़, 1KM लंबी लाइन

बक्सर में सावन की तीसरी सोमवारी पर बक्सर जिले के प्रसिद्ध ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सोमवार सुबह से ही भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर तक लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ का जयघोष मंदिर परिसर से करीब एक किलोमीटर तक भक्तों की कतारें देखी गईं। इस दौरान ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा इलाका शिवमय हो गया। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने स्वयं यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। स्थानीय पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। यही कारण है कि सावन के महीने में बिहार सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भक्त बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ को मनोकामना महादेव और मीना बाबा धाम के नाम से भी पूजते हैं। ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में मंदिर की एक खास बात इसकी दिशा से जुड़ी मान्यता है। आमतौर पर मंदिरों के मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर होते हैं, लेकिन ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। स्थानीय लोगों और पुजारियों के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार, पहले मंदिर का द्वार पूर्व दिशा में था, जो बाद में पश्चिम दिशा की ओर हो गया। इस दिशा परिवर्तन से जुड़ी एक ऐतिहासिक कथा मोहम्मद गजनी से भी संबंधित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब मोहम्मद गजनी मंदिर को तोड़ने के इरादे से यहां पहुंचा, तो मंदिर के पुजारियों ने इसे प्राचीन और धार्मिक महत्व वाला बताते हुए न तोड़ने का आग्रह किया। कहा जाता है कि इस पर गजनी ने उपहास करते हुए चुनौती दी कि यदि यह वास्तव में चमत्कारी मंदिर है, तो रातभर में इसके द्वार की दिशा बदल जानी चाहिए। उसने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो सुबह मंदिर को तोड़ दिया जाएगा। मान्यता है कि अगले दिन जब गजनी मंदिर पहुंचा, तो मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व के बजाय पश्चिम दिशा में था। बक्सर में सावन की तीसरी सोमवारी पर बक्सर जिले के प्रसिद्ध ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सोमवार सुबह से ही भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर तक लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ का जयघोष मंदिर परिसर से करीब एक किलोमीटर तक भक्तों की कतारें देखी गईं। इस दौरान ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा इलाका शिवमय हो गया। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने स्वयं यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। स्थानीय पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। यही कारण है कि सावन के महीने में बिहार सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भक्त बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ को मनोकामना महादेव और मीना बाबा धाम के नाम से भी पूजते हैं। ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में मंदिर की एक खास बात इसकी दिशा से जुड़ी मान्यता है। आमतौर पर मंदिरों के मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर होते हैं, लेकिन ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। स्थानीय लोगों और पुजारियों के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार, पहले मंदिर का द्वार पूर्व दिशा में था, जो बाद में पश्चिम दिशा की ओर हो गया। इस दिशा परिवर्तन से जुड़ी एक ऐतिहासिक कथा मोहम्मद गजनी से भी संबंधित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब मोहम्मद गजनी मंदिर को तोड़ने के इरादे से यहां पहुंचा, तो मंदिर के पुजारियों ने इसे प्राचीन और धार्मिक महत्व वाला बताते हुए न तोड़ने का आग्रह किया। कहा जाता है कि इस पर गजनी ने उपहास करते हुए चुनौती दी कि यदि यह वास्तव में चमत्कारी मंदिर है, तो रातभर में इसके द्वार की दिशा बदल जानी चाहिए। उसने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो सुबह मंदिर को तोड़ दिया जाएगा। मान्यता है कि अगले दिन जब गजनी मंदिर पहुंचा, तो मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व के बजाय पश्चिम दिशा में था।  

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