IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र में अपनी बेबाक और सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) की जिम्मेदारी संभालने के बाद मिलावटखोरों और स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उनकी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। तुकाराम मुंढे की गिनती उन अधिकारियों में होती है, जो अपनी स्पष्ट और कड़े फैसले लेने वाली कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
हालांकि, उनकी बेबाक कार्यशैली को लेकर कई बार सवाल भी उठते रहे हैं। अब तुकाराम मुंढे ने खुद इस पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें अहंकारी समझते हैं, लेकिन वह अहंकारी नहीं बल्कि स्पष्टवादी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पष्टवादिता और अहंकार के बीच बहुत बारीक अंतर होता है।
‘मैं अहंकारी नहीं हूं…’
एक इंटरव्यू में IAS तुकाराम मुंढे ने कहा, जब कोई अधिकारी मजबूती से अपनी भूमिका रखता है और स्थापित व्यवस्था के दबाव में आए बिना नियमों के मुताबिक काम करता है, तो उसके बारे में गलत धारणा बनाई जा सकती है। ऐसे अधिकारी की छवि खराब करने या उसके बारे में गलत संदेश फैलाने की कोशिश भी होती है।
मुंढे ने कहा कि उनकी कार्यशैली का आधार ईमानदारी और पारदर्शिता है। वह अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते हैं और अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहना ही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की देहभाषा या उसके व्यवहार को देखकर उसके व्यक्तित्व का गलत अर्थ निकालना उचित नहीं है।
उनका यह बयान उन लोगों के लिए सीधा जवाब माना जा रहा है, जो उनकी सख्त और बेबाक शैली को अहंकार से जोड़ते हैं।
FDA का मिलावटखोरों पर एक्शन जारी
आईएएस तुकाराम मुंढे ने जब से खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से मिलावट और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनकी चर्चा हो रही है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से लेकर नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन की सख्ती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंढे की कार्यशैली में समय की पाबंदी, अनुशासन और नियमों का सख्ती से पालन प्रमुख माना जाता है। यही वजह है कि प्रशासनिक व्यवस्था में उनकी अलग पहचान बनी हुई है।
25 तबादलों के बावजूद नहीं बदली कार्यशैली
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र में अपनी लगातार होने वाली तबादलों के कारण भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। अपने अब तक के 21 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। उनकी सख्त प्रशासनिक शैली और नियमों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करने की छवि के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और कई बार उनके तबादले भी हुए।
उनकी पहचान एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के तौर पर बनी है। समय पर काम करना, प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाना और भ्रष्टाचार तथा मिलावट के खिलाफ सख्त रुख अपनाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
महाराष्ट्र के छोटे से गांव से IAS बनने का सफर
तुकाराम मुंढे का जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव गांव की संस्कृति और वारकरी परंपरा से रहा है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
वर्ष 2005 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। इसके बाद करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में उन्होंने अपनी स्पष्टवादिता, अनुशासन और कड़े फैसलों के कारण अलग पहचान बनाई। वह इसी साल मई महीने में महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर नियुक्त किये गए।


