हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी नहीं:दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी DPR अंतिम चरण में

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी नहीं:दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी DPR अंतिम चरण में

दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना को अभी तक रेल मंत्रालय से औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। रेलवे बोर्ड ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है। हालांकि, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अपडेट कर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। आरटीआई के माध्यम से परियोजना की वर्तमान स्थिति, सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में बताया कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर कोई स्वीकृत आदेश, अधिसूचना या आधिकारिक पत्र उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही प्री-फिजिबिलिटी स्टडी, भूमि अधिग्रहण, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य से जुड़े अभिलेख भी उपलब्ध नहीं हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं हुई शुरू रेलवे बोर्ड के इस जवाब से स्पष्ट हो गया है कि परियोजना फिलहाल योजना और मूल्यांकन के स्तर पर ही है। पिछले कुछ समय से सीमांचल के विभिन्न जिलों में सर्वेक्षण या भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की चर्चा थी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि परियोजना अभी उस चरण तक नहीं पहुंची है। हालांकि, डीपीआर का अंतिम चरण में होना परियोजना के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। किसी भी बड़ी रेलवे परियोजना में डीपीआर सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें प्रस्तावित मार्ग, स्टेशन, लागत, तकनीकी डिजाइन और भूमि की आवश्यकता जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। डीपीआर पूरी होने के बाद ही परियोजना को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाता है। स्टेशन बनने की संभावनाओं को लेकर लोगों में उत्सुकता किशनगंज जिले से होकर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर गुजरने और यहां स्टेशन बनने की संभावनाओं को लेकर लोगों में उत्सुकता है। लेकिन रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। यानी, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित कॉरिडोर का मार्ग किशनगंज से होकर गुजरेगा या नहीं। यदि भविष्य में इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो इसका लाभ सीमांचल समेत उत्तर बिहार और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों को मिल सकता है। दिल्ली, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ने वाला हाई-स्पीड रेल नेटवर्क व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल रेलवे बोर्ड की ओर से मिली जानकारी यह संकेत देती है कि परियोजना पर कागजी स्तर पर काम जारी है, लेकिन निर्माण या क्रियान्वयन को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में सीमांचल के लोगों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना को अभी तक रेल मंत्रालय से औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। रेलवे बोर्ड ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है। हालांकि, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अपडेट कर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। आरटीआई के माध्यम से परियोजना की वर्तमान स्थिति, सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में बताया कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर कोई स्वीकृत आदेश, अधिसूचना या आधिकारिक पत्र उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही प्री-फिजिबिलिटी स्टडी, भूमि अधिग्रहण, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य से जुड़े अभिलेख भी उपलब्ध नहीं हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं हुई शुरू रेलवे बोर्ड के इस जवाब से स्पष्ट हो गया है कि परियोजना फिलहाल योजना और मूल्यांकन के स्तर पर ही है। पिछले कुछ समय से सीमांचल के विभिन्न जिलों में सर्वेक्षण या भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की चर्चा थी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि परियोजना अभी उस चरण तक नहीं पहुंची है। हालांकि, डीपीआर का अंतिम चरण में होना परियोजना के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। किसी भी बड़ी रेलवे परियोजना में डीपीआर सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें प्रस्तावित मार्ग, स्टेशन, लागत, तकनीकी डिजाइन और भूमि की आवश्यकता जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। डीपीआर पूरी होने के बाद ही परियोजना को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाता है। स्टेशन बनने की संभावनाओं को लेकर लोगों में उत्सुकता किशनगंज जिले से होकर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर गुजरने और यहां स्टेशन बनने की संभावनाओं को लेकर लोगों में उत्सुकता है। लेकिन रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। यानी, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित कॉरिडोर का मार्ग किशनगंज से होकर गुजरेगा या नहीं। यदि भविष्य में इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो इसका लाभ सीमांचल समेत उत्तर बिहार और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों को मिल सकता है। दिल्ली, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ने वाला हाई-स्पीड रेल नेटवर्क व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल रेलवे बोर्ड की ओर से मिली जानकारी यह संकेत देती है कि परियोजना पर कागजी स्तर पर काम जारी है, लेकिन निर्माण या क्रियान्वयन को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में सीमांचल के लोगों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।  

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