आज यानी की 16 अगस्त को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं। अरविंद केजरीवार ने ईमानदारी की राजनीति से दिल्लीवासियों को एक नई उम्मीद दी थी। अरविंद केजरीवाल का आईआईटी से निकलकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर काफी रोचक रहा है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और शिक्षा
हरियाणा के हिसार में 16 अगस्त 1968 को अरविंद केजरीवाल का जन्म हुआ था। उन्होंने शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1989 में आईआईटी खड़गपुर से यांत्रिक अभियात्रिकी में स्नातक किया।
सरकारी नौकरी छोड़ी
इसके बाद साल 1992 में वह भारतीय नागरिक सेवा के भारतीय राजस्व सेवा में आ गए। इसके बाद उनको दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियु्क्त किया गया। लेकिन जल्द ही उनको महसूस हुआ कि सरकार में भ्रष्टाचार की वजह से प्रक्रिया में परदर्शिता की कमी है। लेकिन उन्होंने अपनी आधिकारिक स्थिति रहते हुए ही केजरीवाल ने भ्रष्टाचाक के खिलाफ जंग शुरू कर दी।
शुरूआत में उन्होंने आयकर कार्यालय में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई अहम परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं जनवरी 2000 में उन्होंने काम छोड़ दिया। इसके साथ ही दिल्ली आधारित एक नागरिक आंदोलन परिवर्तन की स्थापना की। फिर फरवरी 2006 में अरविंद केजरीवाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह पूरी तरह से परिवर्तन में ही काम करने लगे।
अन्ना आंदोलन से सुर्खियों में आए
साल 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में जन लोकपाल आंदोलन से अरविंद केजरीवाल सुर्खियों में आए थे। इस आंदोलन में महिला आईपीएस किरण बेदी, प्रशांत भूषण और अन्य के साथ टीम अन्ना का हिस्सा थे। साल 2014 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना आंदोलन से भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बना। इसके बाद ही अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में उतरने का फैसला किया।
आम आदमी पार्टी बनाई
26 नवंबर 2012 में केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी नामक एक राजनीतिक दल बनाया। अन्ना आंदोलन के मुख्य चेहरे इस पार्टी से जुड़े। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी को सफलता मिली, लेकिन बहुमत नहीं मिल सकी। लेकिन कांग्रेस के समर्थन में केजरीवाल पहली बार सीएम बन गए। पहले चुनाव में ही केजरीवाल ने दिल्ली की कांग्रेस सरकार को हराया था।
वहीं केजरीवाल ने कांग्रेस नेता और दिल्ली की तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। फिर साल 2015 में पार्टी ने शानदार जीत हासिल थी। वहीं साल 2020 में दिल्ली की जनता फिर से केजरीवाल पर भरोसा जताया। वहीं पंजाब में भी आप पार्टी की सरकार है। लेकिन साल 2025 के चुनाव में केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा।


