नारनौल से सटे नांगल चौधरी में बन रहे इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का एक फेज का काम 50 फीसद पूरा हो चुका है। एक हजार एकड़ में विकसित किए जा रहे इस प्रोजेक्ट में रेल लाइन, प्लेटफॉर्म, सड़क, बिजली और पानी से जुड़े कई प्रमुख कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। हालांकि, परियोजना की 129 एकड़ जमीन को लेकर 91 किसानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के चलते इस हिस्से में निर्माण कार्य पर रोक लगी हुई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर को होनी है। निजामपुर क्षेत्र में विकसित हो रहा यह लॉजिस्टिक हब वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के नजदीक होने के कारण दक्षिणी हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद माल परिवहन को गति मिलने के साथ क्षेत्र में उद्योग, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। 200 करोड़ से रेल लाइन और प्लेटफॉर्म तैयार लॉजिस्टिक हब के प्रथम चरण में करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसमें रेल लाइन और प्लेटफॉर्म बनाने का काम पूरा हो गया है। इसके अलावा हब क्षेत्र में बिजली, सड़क और पानी की पाइपलाइन से संबंधित जरूरी आधारभूत कार्य भी किए जा चुके हैं। इसी के चलते परियोजना का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा होने की स्थिति में पहुंच गया है। दूसरे चरण में ये सुविधाएं विकसित होंगी अब दूसरे चरण में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, स्क्रैप हैंडलिंग और अन्य सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए के पीपीपी मॉडल के तहत काम प्रस्तावित है। विभिन्न कंपनियों को आमंत्रित कर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से इन कार्यों को आगे बढ़ाया जाना है। 91 किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती हब के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में 91 किसानों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को अगली सुनवाई तक 129 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए थे। अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित है। हालांकि कोर्ट के आदेश में राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अपने अधिग्रहण अधिकारों का प्रयोग करने से नहीं रोका गया है। ऐसे में परियोजना के शेष हिस्से को लेकर आगे की स्थिति न्यायालय की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी। करीब 1,000 एकड़ जमीन पर विकसित हो रहा प्रोजेक्ट लॉजिस्टिक हब के लिए करीब एक हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है। भूमि अधिग्रहण पर सरकार की ओर से करीब 150 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा आधारभूत ढांचे के विकास पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यह परियोजना एनआईसीडीसी हरियाणा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब प्रोजेक्ट लिमिटेड नामक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से विकसित की जा रही है। परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आगे बढ़ाया जा रहा है। फ्रेट कॉरिडोर से सीधे कनेक्ट होगा लॉजिस्टिक हब की सबसे बड़ी खासियत इसका वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के नजदीक होना है। रेल कनेक्टिविटी के कारण यहां देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले माल की आवाजाही आसान होगी। हब में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और स्क्रैप हैंडलिंग जैसी सुविधाएं विकसित होने के बाद क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने से दक्षिणी हरियाणा को फायदा इस बारे में पूर्व मंत्री डा. अभय सिंह यादव ने बताया कि लॉजिस्टिक हब को दक्षिणी हरियाणा के लिए बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसके पूरी तरह विकसित होने के बाद नांगल चौधरी और आसपास के क्षेत्रों में कारोबार तथा रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।


