Chandrashekhar Azad Yuva Sankalp Patra: उत्तर प्रदेश की सियासत अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तरफ मुड़ चुकी है। ऐसे में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 15 अगस्त को युवाओं के लिए अपना 10 सूत्रीय संकल्प पत्र जारी कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी युवाओं के हितों को सबसे ऊपर रखेगी।
यूपी चुनाव 2027 को लेकर चंद्रशेखर आजाद का बड़ा वादा
आजाद ने बताया कि इस संकल्प पत्र में रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, खेल और नशामुक्ति जैसे मुद्दों को जगह दी गई है। उनका कहना है कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए ये कदम जरूरी है।
2 करोड़ नौकरियां और बेरोजगारी भत्ता
संकल्प पत्र की सबसे बड़ी बात है पांच साल में दो करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा। साथ ही खाली पड़े सरकारी पदों पर तुरंत भर्ती और स्टार्टअप शुरू करने वालों को 20 लाख रुपये तक का लोन देने की बात कही गई है। पेपर लीक और भर्ती घोटालों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा भी है। परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन जैसी व्यवस्था खत्म करने, जहां हो सके एक शिफ्ट और एक पेपर रखने तथा नतीजे पारदर्शी तरीके से जारी करने की बात भी शामिल है।
शिक्षा के मोर्चे पर कक्षा एक से 12 तक मुफ्त पढ़ाई का ऐलान किया गया है। सरकारी स्कूलों में एक्स्ट्रा क्लास, डाउट सेशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुफ्त कराने का वादा है। शिक्षा लोन पर दो साल तक ब्याज सहायता भी देने की बात कही गई है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी
हर जिले में इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं के पलायन को रोकने पर जोर दिया गया है। हर विभाग के बजट का 30 फीसदी हिस्सा युवा विकास के लिए रखने और हर छह महीने में इसकी रिपोर्ट जारी करने का प्रस्ताव है। 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों में 25 फीसदी पद युवाओं के लिए आरक्षित रखने की बात भी कही गई है।
खेल के लिए हर स्कूल में सुविधाएं और हर ग्राम पंचायत में मिनी स्टेडियम बनाने का वादा है। कॉलेजों में मुफ्त काउंसलिंग और नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की बात भी संकल्प पत्र में है। कंपनियों के सीएसआर फंड का आधा हिस्सा युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है।
चंद्रशेखर आजाद का ये कदम साफ तौर पर युवा वोट बैंक को साधने की दिशा में है। पिछले कुछ सालों में छात्र आंदोलनों ने साबित कर दिया है कि युवाओं को नजरअंदाज करना किसी पार्टी के लिए मुश्किल है। अब देखना होगा कि ये वादे कागजों तक सीमित रहते हैं या जमीन पर उतरते हैं।


