घाघरा का कटान तेज, नदी किनारे बसे गांवों तक पहुंची::गोंडा में कई स्थायी-अस्थायी मकान कटान की जद में; 24 घंटे में 16cm घटा जलस्तर

घाघरा का कटान तेज, नदी किनारे बसे गांवों तक पहुंची::गोंडा में कई स्थायी-अस्थायी मकान कटान की जद में; 24 घंटे में 16cm घटा जलस्तर

गोंडा में घाघरा नदी का कटान तेज हो गया है। बहुवन मदार माझा, चांदपुर किटौली और ऐली परसौली के पास नदी तेजी से जमीन काट रही है। अब कटान पेड़ों और खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी किनारे बसे गांवों और मकानों तक पहुंच गया है। कई स्थायी और अस्थायी मकान कटान की जद में आ गए हैं। तरबगंज और करनैलगंज तहसील प्रशासन प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। घाघरा नदी के कटान से करनैलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र के किसानों की जमीन और फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। धान, गन्ने समेत अन्य फसलें नदी में समा रही हैं। गोंडा बाढ़ खंड विभाग की टीम कटान रोकने के प्रयास में जुटी है, लेकिन नदी का बहाव तेज होने के कारण कटान का सिलसिला जारी है। दत्त नगर बाणी माझा और साखीपुर चहलवा में पलायन की तैयारी नवाबगंज थाना क्षेत्र के दत्त नगर बाणी माझा और साखीपुर चहलवा में नदी का कटान अस्थायी मकानों तक पहुंच गया है। इसके चलते कई परिवार एक बार फिर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों के सामने अपने घर और सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पहले पेड़ों और खेतों की जमीन काट रही थी, लेकिन अब कटान आबादी की ओर बढ़ रहा है। इससे नदी किनारे रहने वाले परिवारों में दहशत का माहौल है। एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे नदी शनिवार सुबह 11 बजे एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। शुक्रवार सुबह 8 बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 9 सेंटीमीटर नीचे था। इस तरह करीब 27 घंटे के अंतराल में जलस्तर में 16 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। हालांकि, जलस्तर में कमी के बावजूद नदी का कटान जारी रहने से नदी किनारे बसे गांवों के लिए खतरा बना हुआ है। 2.92 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया शनिवार सुबह 11 बजे घाघरा नदी में कुल 2.92 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,80,107 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,09,035 क्यूसेक और सरयू बैराज से 3,213 क्यूसेक पानी शामिल है। बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी के बहाव और कटान पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। बाढ़ खंड की टीम नदी के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही है। 24 घंटे निगरानी, अधिकारियों की लगाई गई ड्यूटी गोंडा बाढ़ खंड की अधिशासी अभियंता जय सिंह ने बताया कि जिन गांवों तक नदी कटान करते हुए पहुंच गई है, वहां लगातार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अधिकारी मौके पर निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को नदी के कटान की स्थिति के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर 24 घंटे से लगातार घट रहा है। विभाग की टीम 24 घंटे निगरानी रख रही है। प्रभावित गांवों में अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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