भारत ने नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे की कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणियों को शुक्रवार को खारिज कर दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीमा पार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के इस्तेमाल को लेकर चिंतित होना चाहिए। इस्लामाबाद में बृहस्पतिवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार के साथ बातचीत के बाद ईडे ने कहा था कि दोनों पक्षों ने जम्मू-कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक के क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। डार ने कहा था कि उन्होंने नॉर्वे के विदेश मंत्री को कश्मीर के ‘‘लंबे समय से अनसुलझे’’ विवाद के बारे में जानकारी दी और सिंधु जल संधि के स्थगन के मुद्दे पर भी बातचीत की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नॉर्वे के विदेश मंत्री की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। जायसवाल ने ईडे की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जिन मुद्दों पर चिंता करनी चाहिए, उनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में वर्तमान में किए जा रहे अत्याचार और सीमा पार आतंकवाद के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का इस्तेमाल करना शामिल हैं।’’
जायसवाल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उस टिप्पणी पर एक अन्य सवाल का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित रखने के फैसले की आलोचना की थी। जायसवाल ने कहा, ‘‘आप सिंधु जल संधि पर हमारे रुख से अवगत हैं और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।’’
भारत ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद घोषित किए गए कई कड़े राजनयिक और आर्थिक कदमों के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था।
इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी।


