बसपा परिवारवाद और धनबल से मुक्त:मायावती बोलीं- सपा को पीडीए का वोट चाहिए, सांसद-विधायक परिवार और पूंजीपतियों से बनाती है

बसपा परिवारवाद और धनबल से मुक्त:मायावती बोलीं- सपा को पीडीए का वोट चाहिए, सांसद-विधायक परिवार और पूंजीपतियों से बनाती है

बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और पूंजीपतियों को चुनावी राजनीति में तरजीह देने का आरोप लगाया है। उन्होंने सपा की ‘पीडीए’ राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को चुनाव में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के वोट चाहिए, लेकिन सांसद-विधायक बनाने के लिए परिवार के लोगों और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी जाती है। मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बसपा छोटे-बड़े किसी भी चुनाव में अपने परिवार, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों और करीबी रिश्तेदारों के साथ बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों को टिकट नहीं देती। उनका दावा है कि बसपा सर्वसमाज के गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कर्मठ अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है। रामगोपाल यादव के नाम पर परिवारवाद का आरोप मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव को लेकर परिवारवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर उम्मीदवार बनाया है, जो सपा मुखिया के करीबी रिश्तेदार हैं। रामगोपाल यादव सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा हैं। वह पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। नथवानी की उम्मीदवारी को पूंजीपतियों से जोड़ा बसपा प्रमुख ने सपा के दूसरे राज्यसभा उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने नथवानी को चर्चित उद्योग घराने से जुड़ा बताते हुए सपा की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाए। मायावती ने लिखा कि सपा को चुनाव में पीडीए का वोट चाहिए, लेकिन सांसद और विधायक बनाने में परिवार के लोगों और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, नथवानी की उम्मीदवारी को लेकर मायावती की यह टिप्पणी उनका राजनीतिक आरोप है। ‘सपा का तीसरा उम्मीदवार चुनाव हारने के लिए होगा’ मायावती ने सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ‘फेस सेविंग’ और चुनाव हारने के लिए होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ‘बसपा परिवारवाद और धनबल से मुक्त’ मायावती ने अपने पोस्ट में बसपा की राजनीति को परिवारवाद और धनबल से मुक्त बताया। उन्होंने कहा कि बसपा चुनावों में बड़े पूंजीपतियों के धनबल का सहारा नहीं लेती, बल्कि पार्टी में काम करने वाले कमजोर और गरीब वर्गों के कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसका समाजवाद और पीडीए की राजनीति उन्हें ‘राजनीतिक ढोंग और छलावा’ अधिक नजर आती है। 2027 चुनाव से पहले बहुजन समाज को सतर्क रहने की अपील मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए दलित, आदिवासी, अति-पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के साथ गरीब अपरकास्ट वर्ग से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति नई नहीं है और पार्टी का ‘दोहरा चाल, चरित्र और चेहरा’ हमेशा से रहा है। मायावती ने इन वर्गों से कहा कि वे चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की नीतियों और उम्मीदवार चयन को देखकर फैसला करें। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों का हित अंबेडकरवादी बसपा में ही सुरक्षित है।

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