भरनो प्रखंड के डोम्बा पंचायत अंतर्गत अम्बोवा गांव स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय अम्बोवा में इन दिनों व्यवस्था की लापरवाही साफ नजर आ रही है। गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले करीब एक महीने से विद्यालय के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है। धुएं के बीच भोजन तैयार करने को मजबूर रसोइयों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। इस विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक की पढ़ाई होती है। इसमें कुल 212 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। बच्चों के लिए हर रोज नियमानुसार मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। विद्यालय में कुल 8 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 2 सरकारी शिक्षक और 6 पारा शिक्षक (सहायक अध्यापक) शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के लिए भोजन जैसी महत्वपूर्ण योजना का सुचारू संचालन नहीं होना, और महीनों तक गैस सिलेंडर उपलब्ध न होना, विद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करता है। गुरुवार को विद्यालय परिसर का दृश्य हैरान करने वाला था। माता समिति की रसोइया तीरथमुनी देवी और बंधनिया उरांव बच्चों के लिए लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती नजर आईं। रसोइयों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पिछले एक महीने से उन्हें रसोई गैस नहीं मिल रही है। मजबूरी में उन्हें हर दिन लकड़ी जलाकर ही बच्चों का भोजन तैयार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान भारी मात्रा में धुआं निकलता है। इससे आंखों में तेज जलन होती है। सांस लेने में गंभीर परेशानी होती है। इसके बावजूद बच्चों के भूखे रहने की चिंता के कारण वे मजबूरी में इसी तरह धुएं के बीच काम करने को विवश हैं। इस पूरे मामले पर जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय बैठा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मध्याह्न भोजन का संचालन उनके द्वारा सीधे नहीं किया जाता, बल्कि यह संयोजिका के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए वे इस विषय पर अधिक कुछ नहीं कह सकते। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले करीब एक वर्ष से विद्यालय को किसी भी प्रकार का फंड नहीं मिला है, जिसके कारण विद्यालय के सुचारू संचालन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने संबंधित जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि रसोइयों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके और बच्चों को समय पर सुचारू रूप से गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन मिल सके। भरनो प्रखंड के डोम्बा पंचायत अंतर्गत अम्बोवा गांव स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय अम्बोवा में इन दिनों व्यवस्था की लापरवाही साफ नजर आ रही है। गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले करीब एक महीने से विद्यालय के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है। धुएं के बीच भोजन तैयार करने को मजबूर रसोइयों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। इस विद्यालय में कक्षा पहली से आठवीं तक की पढ़ाई होती है। इसमें कुल 212 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। बच्चों के लिए हर रोज नियमानुसार मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। विद्यालय में कुल 8 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 2 सरकारी शिक्षक और 6 पारा शिक्षक (सहायक अध्यापक) शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के लिए भोजन जैसी महत्वपूर्ण योजना का सुचारू संचालन नहीं होना, और महीनों तक गैस सिलेंडर उपलब्ध न होना, विद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करता है। गुरुवार को विद्यालय परिसर का दृश्य हैरान करने वाला था। माता समिति की रसोइया तीरथमुनी देवी और बंधनिया उरांव बच्चों के लिए लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती नजर आईं। रसोइयों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पिछले एक महीने से उन्हें रसोई गैस नहीं मिल रही है। मजबूरी में उन्हें हर दिन लकड़ी जलाकर ही बच्चों का भोजन तैयार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान भारी मात्रा में धुआं निकलता है। इससे आंखों में तेज जलन होती है। सांस लेने में गंभीर परेशानी होती है। इसके बावजूद बच्चों के भूखे रहने की चिंता के कारण वे मजबूरी में इसी तरह धुएं के बीच काम करने को विवश हैं। इस पूरे मामले पर जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय बैठा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मध्याह्न भोजन का संचालन उनके द्वारा सीधे नहीं किया जाता, बल्कि यह संयोजिका के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए वे इस विषय पर अधिक कुछ नहीं कह सकते। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले करीब एक वर्ष से विद्यालय को किसी भी प्रकार का फंड नहीं मिला है, जिसके कारण विद्यालय के सुचारू संचालन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने संबंधित जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि रसोइयों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके और बच्चों को समय पर सुचारू रूप से गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन मिल सके।


