BNMU के सीनेट सदस्यों ने कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा:शिक्षकों के पेंडिंग सैलरी भुगतान और प्रतिनियोजन वापस लेने की मांग

BNMU के सीनेट सदस्यों ने कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा:शिक्षकों के पेंडिंग सैलरी भुगतान और प्रतिनियोजन वापस लेने की मांग

मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार झा, शेफालिका शेखर और डॉ. अनिल कुमार ने शुक्रवार को कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में तुरंत कार्रवाई की मांग की। सीनेट सदस्यों ने राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान के नवनियुक्त नियमित शिक्षकों के लंबित वेतन और अतिथि शिक्षकों के मानदेय का अविलंब भुगतान कराने के साथ ही संविदा सहायक प्राध्यापकों के योगदान के बाद प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को उनके मूल महाविद्यालय या विभाग में वापस भेजने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से जनवरी 2026 में राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में नियुक्त नियमित शिक्षकों को करीब सात माह बीतने के बावजूद अब तक एक माह का भी वेतन नहीं मिला है। मानदेय नहीं मिलने से गंभीर आर्थिक संकट शिक्षक नियमित रूप से अपने विभागीय एवं शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। लंबे समय से वेतन लंबित रहने के कारण उनके सामने आर्थिक एवं पारिवारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। इसी तरह सितंबर 2025 में नियुक्त अतिथि शिक्षकों को भी करीब 10 माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सीनेट सदस्यों ने कहा कि अतिथि शिक्षक सीमित मानदेय पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में लंबित वेतन और मानदेय का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। सीनेट सदस्यों ने नवसृजित डिग्री कॉलेजों में संविदा सहायक प्राध्यापकों के विषयवार एवं महाविद्यालयवार आवंटन का मामला उठाया। प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को मूल संस्थान भेजने की मांग ज्ञापन में कहा गया है कि जिन विषयों में कम से कम एक संविदा सहायक प्राध्यापक योगदान कर चुके हैं, वहां कार्यरत प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को तत्काल उनके मूल महाविद्यालय या विभाग में वापस भेजा जाना चाहिए। नियमित शिक्षकों के मूल महाविद्यालय या विभाग में स्वीकृत पद हैं। संविदा शिक्षकों के योगदान के बाद भी उनका प्रतिनियोजन जारी रखने से उनके मूल महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए जिन विषयों में संविदा सहायक प्राध्यापक योगदान कर चुके हैं, वहां प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को मूल संस्थान में वापस भेजने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। सीनेट सदस्यों ने कुलसचिव से दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेने, लंबित वेतन एवं मानदेय का भुगतान कराने और शिक्षकों के प्रतिनियोजन को व्यवस्थित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार झा, शेफालिका शेखर और डॉ. अनिल कुमार ने शुक्रवार को कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में तुरंत कार्रवाई की मांग की। सीनेट सदस्यों ने राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान के नवनियुक्त नियमित शिक्षकों के लंबित वेतन और अतिथि शिक्षकों के मानदेय का अविलंब भुगतान कराने के साथ ही संविदा सहायक प्राध्यापकों के योगदान के बाद प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को उनके मूल महाविद्यालय या विभाग में वापस भेजने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से जनवरी 2026 में राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में नियुक्त नियमित शिक्षकों को करीब सात माह बीतने के बावजूद अब तक एक माह का भी वेतन नहीं मिला है। मानदेय नहीं मिलने से गंभीर आर्थिक संकट शिक्षक नियमित रूप से अपने विभागीय एवं शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। लंबे समय से वेतन लंबित रहने के कारण उनके सामने आर्थिक एवं पारिवारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। इसी तरह सितंबर 2025 में नियुक्त अतिथि शिक्षकों को भी करीब 10 माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सीनेट सदस्यों ने कहा कि अतिथि शिक्षक सीमित मानदेय पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य का महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में लंबित वेतन और मानदेय का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। सीनेट सदस्यों ने नवसृजित डिग्री कॉलेजों में संविदा सहायक प्राध्यापकों के विषयवार एवं महाविद्यालयवार आवंटन का मामला उठाया। प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को मूल संस्थान भेजने की मांग ज्ञापन में कहा गया है कि जिन विषयों में कम से कम एक संविदा सहायक प्राध्यापक योगदान कर चुके हैं, वहां कार्यरत प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को तत्काल उनके मूल महाविद्यालय या विभाग में वापस भेजा जाना चाहिए। नियमित शिक्षकों के मूल महाविद्यालय या विभाग में स्वीकृत पद हैं। संविदा शिक्षकों के योगदान के बाद भी उनका प्रतिनियोजन जारी रखने से उनके मूल महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए जिन विषयों में संविदा सहायक प्राध्यापक योगदान कर चुके हैं, वहां प्रतिनियोजित नियमित शिक्षकों को मूल संस्थान में वापस भेजने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। सीनेट सदस्यों ने कुलसचिव से दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेने, लंबित वेतन एवं मानदेय का भुगतान कराने और शिक्षकों के प्रतिनियोजन को व्यवस्थित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया।  

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