‘मांगें मान ली गईं तो आंदोलन का औचित्य क्या’:तेजस्वी के विधानसभा मार्च पर चिराग पासवान का हमला, शराबबंदी समीक्षा की कही बात

‘मांगें मान ली गईं तो आंदोलन का औचित्य क्या’:तेजस्वी के विधानसभा मार्च पर चिराग पासवान का हमला, शराबबंदी समीक्षा की कही बात

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से 19 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को निशाना साधा। चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दे को लेकर अब भी विरोध और आंदोलन करना सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि चाहे लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हों या बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष, छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। छात्रों की मांगें मान ली गईं तो आंदोलन क्यों? चिराग पासवान ने कहा, छात्रों की अधिकांश मांगों को सरकार की ओर से मान लिया गया है। ऐसे में अब विरोध प्रदर्शन या विधानसभा मार्च का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अगर किसी मुद्दे को लेकर सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाया है, तो उसके बाद भी आंदोलन जारी रखना केवल राजनीति करने जैसा है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों को लेकर राजनीति करने के बजाय उनके हित में काम करने की जरूरत है। चिराग के मुताबिक, छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक आंदोलन का रूप देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। शराबबंदी के 10 साल पूरे, समीक्षा की जरूरत केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में लगातार शराब की बरामदगी की खबरें सामने आती रहती हैं। खासकर सीमावर्ती इलाकों में शराब की आवाजाही और बरामदगी की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में सिर्फ कानून बनाने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता पैदा करने की भी जरूरत है। ‘क्या हासिल किया’, इसका आकलन जरूरी चिराग पासवान ने कहा, शराबबंदी लागू हुए करीब 10 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में अब यह देखना जरूरी है कि शराबबंदी के जिन उद्देश्यों को लेकर इसे लागू किया गया था, उनमें से कितने पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में शराबबंदी से क्या उपलब्धियां हासिल हुईं और कहां कमियां रह गईं, इसका निष्पक्ष आकलन होना चाहिए। उन्होंने शराबबंदी की समीक्षा को जरूरी बताते हुए कहा कि समीक्षा के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कानून के क्रियान्वयन में कहां सुधार की जरूरत है और किस तरह शराब की अवैध बिक्री एवं तस्करी पर और प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से 19 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को निशाना साधा। चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दे को लेकर अब भी विरोध और आंदोलन करना सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि चाहे लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हों या बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष, छात्रों के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। छात्रों की मांगें मान ली गईं तो आंदोलन क्यों? चिराग पासवान ने कहा, छात्रों की अधिकांश मांगों को सरकार की ओर से मान लिया गया है। ऐसे में अब विरोध प्रदर्शन या विधानसभा मार्च का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अगर किसी मुद्दे को लेकर सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाया है, तो उसके बाद भी आंदोलन जारी रखना केवल राजनीति करने जैसा है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों को लेकर राजनीति करने के बजाय उनके हित में काम करने की जरूरत है। चिराग के मुताबिक, छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक आंदोलन का रूप देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। शराबबंदी के 10 साल पूरे, समीक्षा की जरूरत केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में लगातार शराब की बरामदगी की खबरें सामने आती रहती हैं। खासकर सीमावर्ती इलाकों में शराब की आवाजाही और बरामदगी की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में सिर्फ कानून बनाने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता पैदा करने की भी जरूरत है। ‘क्या हासिल किया’, इसका आकलन जरूरी चिराग पासवान ने कहा, शराबबंदी लागू हुए करीब 10 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में अब यह देखना जरूरी है कि शराबबंदी के जिन उद्देश्यों को लेकर इसे लागू किया गया था, उनमें से कितने पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में शराबबंदी से क्या उपलब्धियां हासिल हुईं और कहां कमियां रह गईं, इसका निष्पक्ष आकलन होना चाहिए। उन्होंने शराबबंदी की समीक्षा को जरूरी बताते हुए कहा कि समीक्षा के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कानून के क्रियान्वयन में कहां सुधार की जरूरत है और किस तरह शराब की अवैध बिक्री एवं तस्करी पर और प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है।  

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