वाराणसी के होटल में जहर खाकर आत्महत्या करने वाले मां-बेटे के हर रिश्तेदार ने शव लेने से इनकार कर दिया। पहले मृतक ईशान मुखर्जी के मामा और फिर बुआ-फूफा ने रिश्तेदारी बताई लेकिन बाद में शव लेने से इनकार कर दिया। संबंध टूटने का हवाला देकर 72 घंटे बाद भी कोई मुखर्जी परिवार के शव लेने नहीं आया। पुलिस ने प्रयास किए लेकिन बहन और बहनोई ने शव लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने 12 साल से संबंध नहीं होने का हवाला दिया। 72 घंटे पूरे होने पर शुक्रवार को पुलिस द्वारा तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद सामाजिक संस्था के साथ मिलकर अंतिम संस्कार कराया। महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस विशाल के करीबियों से संपर्क कर रही है। परिजनों और रिश्तेदारों से भी पुलिस संपर्क करने के प्रयास में है। सात अगस्त को तीनों लक्सा थाना क्षेत्र के वाची गेस्ट हाउस में ठहरे थे। 9 अगस्त की रात विशाल की तबीयत खराब हुई और बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। 10 अगस्त की देर शाम होम स्टे में मां-बेटे ने जहर खाकर जान दे दी। कर्ज ही सुसाइड की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र से काशी आए विशाल की मौत, पत्नी जया और बेटे ईशान मुखर्जी के सुसाइड के कई पहलुओं पर जांच ने वारदात की वजह कर्ज को माना। फोन में मिले नंबरों से रिश्तेदारों तक पहुंची पुलिस ने 72 घंटे बाद सभी गुत्थियों को सुलझा लिया। वाराणसी में जान गवांने वाले विशाल ने मुंबई में अपना मकान और दुकान पहले ही बेच दिया इसके बाद कई लोगों से कर्ज ले लिया था। प्रयागराज के कर्नलगंज निवासी बहन पृथा पांडेय और बहनोई भूपेंद्र पांडेय से लक्सा पुलिस ने बृहस्पतिवार को संपर्क किया। विशाल के प्रयागराज निवासी बहन और बहनोई से लक्सा पुलिस ने कई बार संपर्क किया है। परिजनों से बातचीत में पता चला कि अत्यधिक कर्ज के दबाव में परिवार ने यह कदम उठाया। बहन पृथा ने पुलिस को फोन पर बताया कि भैया और भाभी से 12 साल पहले ही संबंध टूट चुका था। प्रयागराज के कर्नलगंज के मूल निवासी विशाल मुखर्जी 15 साल पहले सीमेंट फैक्ट्री में काम करने महाराष्ट्र गए थे और वहीं बस गए। माता पिता को भी साथ ले गए। पृथा ने बताया कि विशाल इकलौते भाई थे। मगर, उनसे कोई रिश्ता नहीं रह गया था। मुंबई जाने के बाद से कोई बातचीत नहीं होती थी। भैया ने कर्ज ले रखा था। पिता के दोस्तों से भी पैसे उधार पर लिए थे। किसी को लौटाते नहीं थे। बेटे ईशान के दोस्तों से भी कर्ज ले रखे थे। गंभीर बीमारी में ज्यादा पैसा खर्च हुआ। भाभी की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी। उनका भी उपचार जारी था। पृथा पांडेय ने बताया कि 2018 में पिता और 2022 में मां की मौत हुई थी। विशाल, उनकी पत्नी जया और बेटे ईशान से कोई मतलब नहीं रखता था। लक्सा थाना प्रभारी राजू कुमार ने बताया कि बहन और बहनोई ने दाह संस्कार में असमर्थता जताई है। ऐसे में 72 घंटे पूरे हो गए। सुबह माता-पिता और बेटे का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मणिकर्णिका घाट पर एक साथ तीनों का दाह संस्कार किया जाएगा। 7 अगस्त को पहुंचे काशी, 9 को मौत मुखर्जी परिवार महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले का रहने वाला था। विशाल पुश्तैनी कारोबार संभालते थे। करीब 1500 किमी का सफर करके 4 दिन की यात्रा पर काशी पहुंचे थे। पुलिस ने कारोबारी के रिश्तेदारों से बात की। पता चला कि विशाल लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इलाज से कोई आराम न मिलने पर उन्होंने परिवार के साथ तीर्थयात्रा पर जाने का फैसला किया था। पिछले तीन महीने से परिवार पूरे देश के धार्मिक स्थल घूमने जा रहा था। सावन में विशाल ने बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन की इच्छा जताई तो बेटे ने टिकट बुक कराया। तीनों 5 अगस्त को मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस से वाराणसी के लिए रवाना हुए। 7 अगस्त की सुबह काशी पहुंचकर वाची होम स्टे में 4 दिन के लिए कमरा बुक किया था।


