17 साल पहले जब मैंने एसआरके एजुकेशन की शुरुआत की, तब छोटे शहरों के विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी समस्या सही जानकारी और काउंसलिंग की थी। उस समय न स्मार्टफोन थे और न इंटरनेट पर हर जानकारी आसानी से उपलब्ध थी। आज जानकारी बहुत है, लेकिन सही जानकारी चुनना और उसका सही इस्तेमाल करना उतना ही महत्वपूर्ण है। यह कहना है एसआरके एजुकेशन के डायरेक्टर विश्वजीत का। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी में कोचिंग के साथ सेल्फ-स्टडी सबसे ज्यादा मायने रखती है। कोचिंग चुनते समय उसके पिछले वर्षों के रिजल्ट और बैकग्राउंड को जरूर देखना चाहिए। इसके बाद काउंसलिंग और चॉइस फिलिंग का सही होना बेहद जरूरी है। विश्वजीत ने कहा कि स्टूडेंट की रैंक, स्कोर, स्टेट डोमिसाइल और कैटेगरी के आधार पर कॉलेज का चयन करना चाहिए। केवल कॉलेज का नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। वहां की ओपीडी, पेशेंट फ्लो, कनेक्टिविटी और मैनेजमेंट को भी देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि MBBS ही हेल्थकेयर में एकमात्र विकल्प नहीं है। कम स्कोर वाले विद्यार्थी BAMS, BHMS, BDS और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में भी अपना करियर बना सकते हैं। अगर लक्ष्य PG करना है, तो उसकी प्लानिंग भी पहले दिन से शुरू कर देनी चाहिए।


