पीडीएस लाइसेंस चयन प्रक्रिया में धांधली का आरोप:डीएम कार्यालय पहुंचे दर्जनों अभ्यर्थी, फर्जी दस्तावेजों की जांच की मांग

पीडीएस लाइसेंस चयन प्रक्रिया में धांधली का आरोप:डीएम कार्यालय पहुंचे दर्जनों अभ्यर्थी, फर्जी दस्तावेजों की जांच की मांग

पूर्णिया जिले में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों के लाइसेंस जारी करने के लिए जारी मेधा सूची को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चयन प्रक्रिया में अनियमितता और फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए, लगभग 30 से 35 अभ्यर्थी पूर्णिया जिला पदाधिकारी (डीएम) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएम अंशुल कुमार को एक लिखित आवेदन सौंपा। अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन में चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह विवाद सदर अनुमंडल और धमदाहा अनुमंडल के अंतर्गत आने वाली पीडीएस दुकानों से संबंधित है। कम अंक वालों को शीर्ष पर रखा, फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र का आरोप डीएम कार्यालय पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप है कि जारी सूची में भारी त्रुटियां हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि मेधा सूची में कई ऐसे अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है जिन्होंने शैक्षणिक योग्यता के फर्जी प्रमाण पत्र संलग्न किए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, सभी आवेदक एक-दूसरे के आसपास के क्षेत्रों के निवासी हैं और एक-दूसरे की वास्तविक शैक्षणिक पृष्ठभूमि से भली-भांति परिचित हैं। इसकी उन्हें इस बात की जानकारी है। आवेदकों का कहना है कि अधिक प्रतिशत अंक और उच्च योग्यता होने के बावजूद कई योग्य उम्मीदवारों के आवेदनों को अपूर्ण घोषित कर निचली रैंक पर धकेल दिया गया है, जबकि कम प्रतिशत अंक वालों को क्रमांक 1 पर जगह दी गई है। अभ्यर्थियों ने बताया कि अनुसूची-1 के क्रमांक 3 से 13 तक को सही ढंग से न भरे होने का हवाला देकर फॉर्म अपूर्ण घोषित किए गए, जबकि इसके लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए थे। अभ्यर्थियों ने इसके समर्थन में आवश्यक शपथ पत्र और सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र संलग्न किए थे। अधिक परसेंटेज होने के बावजूद हमें नीचे रखा गया आवेदन देने पहुंचे श्रीनगर प्रखंड के अभ्यर्थी आफताब राजा ने कहा कि हम लोगों ने पीडीएस डीलर के लिए आवेदन किया था। मेधा सूची जारी होने पर कई अभ्यर्थियों को अपूर्ण घोषित कर दिया गया। अधिक परसेंटेज होने के बावजूद हमें नीचे रखा गया है और कम परसेंटेज वालों को क्रमांक 1 पर जगह दी गई है। कई लोगों ने फर्जी तरीके से पीजी का सर्टिफिकेट लगाकर अपने मार्क्स बढ़ाए हैं। हमारी मांग है कि कागजातों की निष्पक्ष जांच की जाए और मेधा सूची को दुरुस्त किया जाए। वहीं पूर्णिया सिटी की रहने वाली अभ्यर्थी नैना कुमारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मेरा अधिक अंक है और पीजी की डिग्री भी है, फिर भी मेरे फॉर्म को अपूर्ण बताकर नीचे कर दिया गया। स्थलीय जांच और एमओ ऑफिस में सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने कहा था कि सबकुछ सही है। लेकिन सूची आने पर कम अंक वालों को ऊपर और ज्यादा अंक वालों को नीचे कर दिया गया। इसमें मिलीभगत और लेन-देन की आशंका है। हमारी डीएम सर से मांग है कि पात्र उम्मीदवारों को सही मौका मिले और धांधली करने वालों पर कार्रवाई हो। डीएम को सौंपा आवेदन आपत्ति दर्ज कराने की आधिकारिक अंतिम तिथि बीत जाने के बाद, अभ्यर्थियों ने सीधे जिला अधिकारी से गुहार लगाई। आवेदकों ने बताया कि उनकी समस्याओं को सुनने के बाद पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार ने आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि मामले पर संज्ञान लिया जाएगा और पूरी वस्तु स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जन वितरण प्रणाली दुकानों के लाइसेंस निर्गत करने की चयन समिति में जिलाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी शामिल होते हैं। प्रत्येक प्रखंड के मार्केटिंग ऑफिसर द्वारा स्थलीय निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई थी। पूर्णिया जिले में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों के लाइसेंस जारी करने के लिए जारी मेधा सूची को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चयन प्रक्रिया में अनियमितता और फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए, लगभग 30 से 35 अभ्यर्थी पूर्णिया जिला पदाधिकारी (डीएम) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएम अंशुल कुमार को एक लिखित आवेदन सौंपा। अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन में चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह विवाद सदर अनुमंडल और धमदाहा अनुमंडल के अंतर्गत आने वाली पीडीएस दुकानों से संबंधित है। कम अंक वालों को शीर्ष पर रखा, फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र का आरोप डीएम कार्यालय पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप है कि जारी सूची में भारी त्रुटियां हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि मेधा सूची में कई ऐसे अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है जिन्होंने शैक्षणिक योग्यता के फर्जी प्रमाण पत्र संलग्न किए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, सभी आवेदक एक-दूसरे के आसपास के क्षेत्रों के निवासी हैं और एक-दूसरे की वास्तविक शैक्षणिक पृष्ठभूमि से भली-भांति परिचित हैं। इसकी उन्हें इस बात की जानकारी है। आवेदकों का कहना है कि अधिक प्रतिशत अंक और उच्च योग्यता होने के बावजूद कई योग्य उम्मीदवारों के आवेदनों को अपूर्ण घोषित कर निचली रैंक पर धकेल दिया गया है, जबकि कम प्रतिशत अंक वालों को क्रमांक 1 पर जगह दी गई है। अभ्यर्थियों ने बताया कि अनुसूची-1 के क्रमांक 3 से 13 तक को सही ढंग से न भरे होने का हवाला देकर फॉर्म अपूर्ण घोषित किए गए, जबकि इसके लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए थे। अभ्यर्थियों ने इसके समर्थन में आवश्यक शपथ पत्र और सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र संलग्न किए थे। अधिक परसेंटेज होने के बावजूद हमें नीचे रखा गया आवेदन देने पहुंचे श्रीनगर प्रखंड के अभ्यर्थी आफताब राजा ने कहा कि हम लोगों ने पीडीएस डीलर के लिए आवेदन किया था। मेधा सूची जारी होने पर कई अभ्यर्थियों को अपूर्ण घोषित कर दिया गया। अधिक परसेंटेज होने के बावजूद हमें नीचे रखा गया है और कम परसेंटेज वालों को क्रमांक 1 पर जगह दी गई है। कई लोगों ने फर्जी तरीके से पीजी का सर्टिफिकेट लगाकर अपने मार्क्स बढ़ाए हैं। हमारी मांग है कि कागजातों की निष्पक्ष जांच की जाए और मेधा सूची को दुरुस्त किया जाए। वहीं पूर्णिया सिटी की रहने वाली अभ्यर्थी नैना कुमारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मेरा अधिक अंक है और पीजी की डिग्री भी है, फिर भी मेरे फॉर्म को अपूर्ण बताकर नीचे कर दिया गया। स्थलीय जांच और एमओ ऑफिस में सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने कहा था कि सबकुछ सही है। लेकिन सूची आने पर कम अंक वालों को ऊपर और ज्यादा अंक वालों को नीचे कर दिया गया। इसमें मिलीभगत और लेन-देन की आशंका है। हमारी डीएम सर से मांग है कि पात्र उम्मीदवारों को सही मौका मिले और धांधली करने वालों पर कार्रवाई हो। डीएम को सौंपा आवेदन आपत्ति दर्ज कराने की आधिकारिक अंतिम तिथि बीत जाने के बाद, अभ्यर्थियों ने सीधे जिला अधिकारी से गुहार लगाई। आवेदकों ने बताया कि उनकी समस्याओं को सुनने के बाद पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार ने आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि मामले पर संज्ञान लिया जाएगा और पूरी वस्तु स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जन वितरण प्रणाली दुकानों के लाइसेंस निर्गत करने की चयन समिति में जिलाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी शामिल होते हैं। प्रत्येक प्रखंड के मार्केटिंग ऑफिसर द्वारा स्थलीय निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई थी।  

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