महाराष्ट्र के नांदेड में 13 अगस्त को निहंग सिखों ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर तलवार से हमला बोल दिया। इस घटना के बाद 40 साल पहले महाराष्ट्र के ही पुणे में हुई एक घटना याद आ गई। 1986 में अगस्त महीने में ही 10 तारीख को हमलावरों ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एएस वैद्य को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था। उनसे सिख ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर नाराज थे।
लगातार धमकी देते रहे थे सिख आतंकी
वैद्य सेना में 31 साल रहे। उन्हें सेना प्रमुख बनाने के कुछ ही दिन बाद इंदिरा गांधी ने पंजाब के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार का नेतृत्व करने के लिए भेजा। इस वजह से वह सिखों के जानी दुश्मन बन गए थे। साउथ ब्लॉक में सेना प्रमुख के दफ्तर में लगभग रोज सिख आतंकियों के ऐसे खत आते थे जिनमें उन्हें जान से मार डालने की धमकी होती थी।
जनरल वैद्य कहते- किसी गोली पर मेरा नाम लिखा होगा तो वह आकर ही रहेगी, इसमें डरना क्या
जनरल वैद्य के स्टाफ उन्हें जब आतंकियों की धमकी को लेकर सतर्क करते थे तो उनका जवाब यही होता था कि दो युद्ध लड़ लेने के बाद मैं खतरों से भाग नहीं सकता। अगर मेरे नसीब में गोली लिखी होगी तो मेरे नाम की गोली आ ही जाएगी।
10 अगस्त, 1986 को वह गोली आ ही गई। उनके पसंदीदा शहर पुणे में। उसी शहर में जहां वह सेना से रिटायर होने के बाद सुकून की ज़िंदगी बिताना चाहते थे। दिन के 11.45 बज रहे थे। जनरल की कार के पास एक नई सुजुकी मोटरसाइकल आए। उस पर सवार काली जैकेट पहने शख्स ने ड्राइवर सीट की तरफ से जनरल वैद्य के सिर को गोलियों से छलनी कर दिया। पहली ही गोली उनकी खोपड़ी में लगी, दूसरी भी वहीं धंसी और तीसरी कंधे में लगी। पल भर में उनके प्राण पखेरू उड़ गए। पत्नी भानुमती भी साथ ही थीं। उनका भी कंधा जख्मी हो गया था। जख्मी हालत में ही वह पति की लाश गोद में लिए रहीं।
जनरल वैद्य को इंदिरा ने बनाया था सेना प्रमुख, विवादित रहा था फैसला
वैद्य को 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार से कुछ वक्त पहले ही सेना प्रमुख बनाया गया था। वह जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) थे। उन्हें 1983 में सेना प्रमुख बनाया गया था। इससे नाराज होकर लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया था। सिन्हा वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ थे और अपने से जूनियर को सेना प्रमुख बनाए जाने से नाराज हो गए थे।
वैद्य को सेना प्रमुख बनाने का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का फैसला बड़ा विवादों में रहा था। यहां तक कि 2016 में जब कांग्रेस ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाए जाने को सही नहीं बताया था, तब भी पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह ने इंदिरा के ‘उस फैसले को गलत’ कहा था।
2016 में जनरल रावत को दो सीनियर अफसरों को नजरअंदाज कर सेना प्रमुख बनाया गया था। अमरिंदर ने इसे गलत बताते हुए इंदिरा सरकार द्वारा जनरल वैद्य की नियुक्ति को भी गलत बताया था।


