डीग में आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए गुरुवार को नगर परिषद एवं नगर पालिका सभापति-अध्यक्ष पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इस लॉटरी में डीग नगर परिषद का सभापति पद अनारक्षित (ओपन) घोषित किया गया है। आरक्षण की यह स्थिति सामने आते ही डीग में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और संभावित दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। डीग नगर परिषद में कुल 40 वार्ड हैं। पिछली बार सभापति पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित था। तब हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का बोर्ड बना था और निरंजन लाल टकसालिया को डीग नगर पालिका का अध्यक्ष चुना गया था। डीग को नया जिला बनाए जाने के बाद उन्हें नगर परिषद सभापति की जिम्मेदारी सौंपी गई। आगामी चुनावों में सभापति पद के अनारक्षित होने से अब किसी भी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकता है। इस स्थिति ने भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों में सभापति पद के संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। वार्ड स्तर पर भी संभावित प्रत्याशियों द्वारा समर्थन जुटाने के लिए राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इसी आरक्षण लॉटरी में डीग-कुम्हेर नगर पालिका अध्यक्ष पद भी अनारक्षित (ओपन) रखा गया है। डीग-कामां का अध्यक्ष पद भी अनारक्षित ओपन श्रेणी में है। इसके अतिरिक्त, डीग नगर पालिका का अध्यक्ष पद ओबीसी ओपन तथा डीग-पहाड़ी नगर पालिका अध्यक्ष पद भी अनारक्षित ओपन घोषित किया गया है। डीग नगर परिषद का सभापति पद ओपन होने के बाद राजनीतिक दलों के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ना निश्चित है। विशेष रूप से, भाजपा के सामने पिछले बोर्ड के प्रदर्शन को देखते हुए आगामी चुनाव में एक मजबूत चेहरा उतारने की चुनौती होगी। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस अनारक्षित सीट को अपने लिए एक नए राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।


