Otitis Media: बच्चों के कान में दर्द और बुखार को न करें नजरअंदाज, हो सकता है Ear Infection का संकेत

Otitis Media: बच्चों के कान में दर्द और बुखार को न करें नजरअंदाज, हो सकता है Ear Infection का संकेत

Otitis Media Symptoms: छोटे बच्चों में कान का दर्द और बुखार एक बहुत ही आम समस्या लगती है, लेकिन इसे कभी भी मामूली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कान में संक्रमण (Acute Otitis Media) का एक बड़ा संकेत हो सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत बच्चे अपने जीवन के पहले तीन वर्षों के भीतर कम से कम एक बार कान के संक्रमण (Otitis Media) का शिकार जरूर होते हैं। आइए जानते हैं कि ये संक्रमण क्या है और इसके लक्षण क्या-क्या हैं?

क्या होता है ओटाइटिस मीडिया (Otitis Media)?

ओटाइटिस मीडिया (Otitis Media) कान के मध्य भाग (Middle Ear) में होने वाला एक प्रकार का संक्रमण है। यह हिस्सा कान के पर्दे (Eardrum) के ठीक पीछे होता है। जब बच्चे को सर्दी, खांसी या गले में खराश होती है, तो कान और गले को जोड़ने वाली नली (Eustachian Tube) में रुकावट या सूजन आ जाती है। इसके कारण मध्य कान में तरल (Fluid) जमा होने लगता है और वहां बैक्टीरिया या वायरस पनपने लगते हैं, जो दर्द और बुखार का मुख्य कारण बनते हैं। नेचर रिव्यूज डिजीज प्राइमर्स की स्टडी के अनुसार, यह संक्रमण केवल बैक्टीरिया ही नहीं बल्कि कई बार वायरल इन्फेक्शन (जैसे रेस्पिरेटरी सिंसिशियाल वायरस या इन्फ्लूएंजा) के बाद शुरू होता है। हर कान के दर्द में तुरंत एंटीबायोटिक देने के बजाय शुरुआती 48 से 72 घंटों तक लक्षणों पर नजर रखना और दर्द निवारक प्रबंधन करना अधिक सुरक्षित होता है।

बच्चों में कान के संक्रमण के मुख्य लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, छोटा बच्चा अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता पाता, इसलिए माता-पिता को उनके व्यवहार और शरीर के लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए;

  • कान को बार-बार खींचना या रगड़ना।
  • तेज बुखार होना
  • लगातार रोना और चिड़चिड़ापन।
  • कान से तरल बहना।
  • सोने और खाने में दिक्कत।
  • संतुलन बिगड़ा महसूस होना।

यह संक्रमण बच्चों में ही ज्यादा क्यों होता है?

बच्चों की शारीरिक संरचना वयस्कों से थोड़ी अलग होती है। बच्चों की युस्टेशियन ट्यूब (Eustachian Tube) छोटी, पतली और अधिक क्षैतिज (Horizontal) होती है। जब बच्चे को सर्दी या जुकाम होता है, तो नाक और गले का बलगम (Mucus) आसानी से कान तक पहुंच जाता है और वहीं बंद हो जाता है। इसके अलावा बच्चों की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) भी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

  • यदि बुखार 102°F से अधिक हो या 2 दिन से ज्यादा समय तक बना रहे।
  • कान से मवाद, खून या कोई तरल बह रहा हो।
  • बच्चा बहुत अधिक बेचैन हो और लगातार रो रहा हो।
  • बच्चे को सुनने में समस्या महसूस हो रही हो या वह आवाज देने पर प्रतिक्रिया न दे।

संक्रमण से बचाव के उपाय

  • कम से कम 6 महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध पिलाएं।
  • सिटिंग पोजीशन में दूध पिलाएं।
  • धूम्रपान से दूर रखें।
  • निमोनिया (Pneumococcal Vaccine) और फ्लू के टीके जरूर लगवाएं।
  • सफाई का ध्यान रखें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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