कर्मशाला में किसानों को दी गई योजनाओं की जानकारी

प्रखंड कार्यालय सभागार में मंगलवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख कुमारी बिनीता, प्रखंड कृषि पदाधिकारी घनश्याम कुमार महतो, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक विजय कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक निहारिका सिन्हा, बीपीएम प्रदीप खलखो व एफटीपी राजीव पांडेय ने संयुक्त रूप स दीप प्रज्वलित कर किया। कर्मशाला में उपस्थित किसानों को कृषि, पशुपालन, आत्मा उद्यान व मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इआई नीनो के प्रभाव से 2026 में भारत में मानसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा रहा है, खरीफ फसलों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता हैं। इससे निपटने के लिए सरकार व कृषि विभाग द्वारा सुखा रोधी बीज, जल संरक्षण व फसल बीमा पर आधारित मजबूत आकस्मिक योजना तैयार की गई है, जिसमे धान के अलावे कम अवधि वाले रागी (मंडुआ), बाजरे एवं दलहन की फसलें उगाने की सलाह दी गई। माइक्रो इरिगेशन के तहत ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और मलचिंग तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात बताई गई। वैकल्पिक फसलों के साथ साथ धान व अरहर के शॉर्ट ड्यूरेशन वैरायटी वाले 90 से 120 दिन के बीच होने वाले बीज की जानकारी दी गई। मौके पर विभिन्न गांवों के कृषक मित्र, आजीविका कृषक मित्र व किसान उपस्थित थे। प्रखंड कार्यालय सभागार में मंगलवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख कुमारी बिनीता, प्रखंड कृषि पदाधिकारी घनश्याम कुमार महतो, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक विजय कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक निहारिका सिन्हा, बीपीएम प्रदीप खलखो व एफटीपी राजीव पांडेय ने संयुक्त रूप स दीप प्रज्वलित कर किया। कर्मशाला में उपस्थित किसानों को कृषि, पशुपालन, आत्मा उद्यान व मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इआई नीनो के प्रभाव से 2026 में भारत में मानसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा रहा है, खरीफ फसलों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता हैं। इससे निपटने के लिए सरकार व कृषि विभाग द्वारा सुखा रोधी बीज, जल संरक्षण व फसल बीमा पर आधारित मजबूत आकस्मिक योजना तैयार की गई है, जिसमे धान के अलावे कम अवधि वाले रागी (मंडुआ), बाजरे एवं दलहन की फसलें उगाने की सलाह दी गई। माइक्रो इरिगेशन के तहत ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और मलचिंग तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात बताई गई। वैकल्पिक फसलों के साथ साथ धान व अरहर के शॉर्ट ड्यूरेशन वैरायटी वाले 90 से 120 दिन के बीच होने वाले बीज की जानकारी दी गई। मौके पर विभिन्न गांवों के कृषक मित्र, आजीविका कृषक मित्र व किसान उपस्थित थे।  

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कर्मशाला में किसानों को दी गई योजनाओं की जानकारी

प्रखंड कार्यालय सभागार में मंगलवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख कुमारी बिनीता, प्रखंड कृषि पदाधिकारी घनश्याम कुमार महतो, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक विजय कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक निहारिका सिन्हा, बीपीएम प्रदीप खलखो व एफटीपी राजीव पांडेय ने संयुक्त रूप स दीप प्रज्वलित कर किया। कर्मशाला में उपस्थित किसानों को कृषि, पशुपालन, आत्मा उद्यान व मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इआई नीनो के प्रभाव से 2026 में भारत में मानसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा रहा है, खरीफ फसलों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता हैं। इससे निपटने के लिए सरकार व कृषि विभाग द्वारा सुखा रोधी बीज, जल संरक्षण व फसल बीमा पर आधारित मजबूत आकस्मिक योजना तैयार की गई है, जिसमे धान के अलावे कम अवधि वाले रागी (मंडुआ), बाजरे एवं दलहन की फसलें उगाने की सलाह दी गई। माइक्रो इरिगेशन के तहत ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और मलचिंग तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात बताई गई। वैकल्पिक फसलों के साथ साथ धान व अरहर के शॉर्ट ड्यूरेशन वैरायटी वाले 90 से 120 दिन के बीच होने वाले बीज की जानकारी दी गई। मौके पर विभिन्न गांवों के कृषक मित्र, आजीविका कृषक मित्र व किसान उपस्थित थे। प्रखंड कार्यालय सभागार में मंगलवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख कुमारी बिनीता, प्रखंड कृषि पदाधिकारी घनश्याम कुमार महतो, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक विजय कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक निहारिका सिन्हा, बीपीएम प्रदीप खलखो व एफटीपी राजीव पांडेय ने संयुक्त रूप स दीप प्रज्वलित कर किया। कर्मशाला में उपस्थित किसानों को कृषि, पशुपालन, आत्मा उद्यान व मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इआई नीनो के प्रभाव से 2026 में भारत में मानसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया जा रहा है, खरीफ फसलों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता हैं। इससे निपटने के लिए सरकार व कृषि विभाग द्वारा सुखा रोधी बीज, जल संरक्षण व फसल बीमा पर आधारित मजबूत आकस्मिक योजना तैयार की गई है, जिसमे धान के अलावे कम अवधि वाले रागी (मंडुआ), बाजरे एवं दलहन की फसलें उगाने की सलाह दी गई। माइक्रो इरिगेशन के तहत ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर और मलचिंग तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात बताई गई। वैकल्पिक फसलों के साथ साथ धान व अरहर के शॉर्ट ड्यूरेशन वैरायटी वाले 90 से 120 दिन के बीच होने वाले बीज की जानकारी दी गई। मौके पर विभिन्न गांवों के कृषक मित्र, आजीविका कृषक मित्र व किसान उपस्थित थे।  

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