भोपाल-बैतूल फोरलेन पर टाइगर कॉरिडोर निर्माण पर हाईकोर्ट का निर्देश:NHAI, NTCA और सरकार को 4 हफ्ते में सुरक्षा योजना तय करने के लिए कहा

भोपाल-बैतूल फोरलेन पर टाइगर कॉरिडोर निर्माण पर हाईकोर्ट का निर्देश:NHAI, NTCA और सरकार को 4 हफ्ते में सुरक्षा योजना तय करने के लिए कहा

बैतूल जबलपुर-भोपाल-बैतूल फोरलेन के सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच आने वाले हिस्से को लेकर हाईकोर्ट ने फिलहाल फैसला संबंधित एजेंसियों पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने NHAI, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और राज्य सरकार को संयुक्त बैठक करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में यह तय किया जाएगा कि टाइगर कॉरिडोर में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किस तरह के स्ट्रक्चर बनाए जाएं और हाईवे निर्माण को किस तरीके से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में हुए फैसले की रिपोर्ट चार सप्ताह यानी 28 दिन के भीतर हाईकोर्ट में पेश करनी होगी। 19.50 किमी जंगल क्षेत्र में निर्माण को लेकर याचिका यह मामला महाराष्ट्र के अद्वैत क्योले की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में सतपुड़ा और महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच करीब 19.50 किलोमीटर जंगल क्षेत्र में हाईवे निर्माण को चुनौती दी गई है। याचिका में वन्यजीवों, खासकर बाघों की सुरक्षित आवाजाही और टाइगर कॉरिडोर में हाईवे निर्माण के असर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। बैठक में तय होगा कितने स्ट्रक्चर जरूरी NHAI के प्रोजेक्ट इंचार्ज मनीष मीना ने बताया कि हाईकोर्ट के ताजा आदेश के अनुसार संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर बैठक कर आगे की योजना तय करनी है। उनके मुताबिक बैठक में NHAI, NTCA और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। इसमें टाइगर कॉरिडोर में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कितने और किस तरह के स्ट्रक्चर बनाए जाने हैं, इस पर चर्चा होगी। मनीष मीना ने बताया कि NTCA की ओर से दिए जाने वाले तकनीकी और सुरक्षा संबंधी निर्देशों के अनुसार ही निर्माण की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में लिए गए फैसले के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट देगा आगे का आदेश संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में अपनी रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट के सामने पेश करनी है। इसके बाद कोर्ट मामले में आगे का आदेश जारी करेगा। फिलहाल फोरलेन निर्माण को लेकर अगले चार सप्ताह महत्वपूर्ण हैं। बैठक में यह तय होगा कि टाइगर कॉरिडोर में कितने अंडरपास, ओवरपास या अन्य वन्यजीव संरचनाओं की जरूरत है। इसी आधार पर हाईवे निर्माण की आगे की दिशा तय होगी।

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