जापानी तकनीक से साफ होगा पटना के नालों का पानी:मानसून के बाद 10 घाटों पर लगेंगी बायोरीमेडिएशन मशीनें, एक से 10 लाख लीटर पानी होगा साफ

जापानी तकनीक से साफ होगा पटना के नालों का पानी:मानसून के बाद 10 घाटों पर लगेंगी बायोरीमेडिएशन मशीनें, एक से 10 लाख लीटर पानी होगा साफ

गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने और शहर के छोटे नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए बुडको नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसके तहत नालों के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक ले जाने के बजाय जापानी बायोरीमेडिएशन तकनीक से मौके पर ही साफ किया जाएगा। पटना के 10 प्रमुख घाटों पर यह सिस्टम लगाने की तैयारी है। एक मशीन से 10 लाख लीटर पानी साफ होगा। इस प्रक्रिया में बाॅयोलाजिकल तरीके से पानी में मौजूद गंदगी और प्रदूषक तत्वों को कम किया जाएगा, ताकि नाले का पानी गंगा में जाने से पहले अधिक साफ हो सके। 10 प्रमुख घाटों पर लगेगी मशीन इस तकनीक का हाल ही में प्रोजेक्ट ब्लू इकोसिस्टम के तहत एनआईटी घाट पर ट्रायल किया गया, जो सफल रहा। ट्रायल के बाद अब बारिश का मौसम खत्म होने पर पटना के 10 प्रमुख घाटों पर यह सिस्टम लगाने की तैयारी है। इनमें गोलकपुर घाट, आलमगंज घाट और भद्र घाट समेत अन्य घाट शामिल हैं। इस मॉडल के तहत करीब एक एमएलडी यानी 10 लाख लीटर पानी को ट्रीट करने की क्षमता होगी। शहर के छोटे नालों से निकलने वाला पानी सीधे गंगा में पहुंचने से पहले इसी सिस्टम के जरिए साफ किया जाएगा। इससे छोटे नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एसटीपी से सस्ता और आसान विकल्प छोटे नालों को एसटीपी तक ले जाना कई जगह मुश्किल और महंगा होता है। ऐसे में नाले के मुहाने पर ही पानी को ट्रीट करने वाला यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है। एक सिस्टम लगाने पर करीब 2 से 2.5 लाख रुपए खर्च आने का अनुमान है। इसके मुकाबले पारंपरिक नाला ट्रीटमेंट मशीनों की लागत काफी अधिक बताई जा रही है। इस पहल से कम लागत में छोटे नालों के पानी को साफ करने और गंगा में प्रदूषण का स्तर घटाने में मदद मिल सकती है। बारिश के बाद मशीनों की स्थापना शुरू होने की तैयारी है। गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने और शहर के छोटे नालों के गंदे पानी को साफ करने के लिए बुडको नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसके तहत नालों के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक ले जाने के बजाय जापानी बायोरीमेडिएशन तकनीक से मौके पर ही साफ किया जाएगा। पटना के 10 प्रमुख घाटों पर यह सिस्टम लगाने की तैयारी है। एक मशीन से 10 लाख लीटर पानी साफ होगा। इस प्रक्रिया में बाॅयोलाजिकल तरीके से पानी में मौजूद गंदगी और प्रदूषक तत्वों को कम किया जाएगा, ताकि नाले का पानी गंगा में जाने से पहले अधिक साफ हो सके। 10 प्रमुख घाटों पर लगेगी मशीन इस तकनीक का हाल ही में प्रोजेक्ट ब्लू इकोसिस्टम के तहत एनआईटी घाट पर ट्रायल किया गया, जो सफल रहा। ट्रायल के बाद अब बारिश का मौसम खत्म होने पर पटना के 10 प्रमुख घाटों पर यह सिस्टम लगाने की तैयारी है। इनमें गोलकपुर घाट, आलमगंज घाट और भद्र घाट समेत अन्य घाट शामिल हैं। इस मॉडल के तहत करीब एक एमएलडी यानी 10 लाख लीटर पानी को ट्रीट करने की क्षमता होगी। शहर के छोटे नालों से निकलने वाला पानी सीधे गंगा में पहुंचने से पहले इसी सिस्टम के जरिए साफ किया जाएगा। इससे छोटे नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एसटीपी से सस्ता और आसान विकल्प छोटे नालों को एसटीपी तक ले जाना कई जगह मुश्किल और महंगा होता है। ऐसे में नाले के मुहाने पर ही पानी को ट्रीट करने वाला यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है। एक सिस्टम लगाने पर करीब 2 से 2.5 लाख रुपए खर्च आने का अनुमान है। इसके मुकाबले पारंपरिक नाला ट्रीटमेंट मशीनों की लागत काफी अधिक बताई जा रही है। इस पहल से कम लागत में छोटे नालों के पानी को साफ करने और गंगा में प्रदूषण का स्तर घटाने में मदद मिल सकती है। बारिश के बाद मशीनों की स्थापना शुरू होने की तैयारी है।  

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