चमोली में बादल फटने से तबाही, बाढ़ में बहा बेली ब्रिज, एक BRO कर्मचारी लापता होने का दावा, नीती घाटी के गांवों का संपर्क टूटा

चमोली में बादल फटने से तबाही, बाढ़ में बहा बेली ब्रिज, एक BRO कर्मचारी लापता होने का दावा, नीती घाटी के गांवों का संपर्क टूटा

Uttarakhand Cloudburst News: उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में सोमवार शाम बादल फटने के बाद अचानक आए जलसैलाब ने भारी तबाही मचा दी। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि 123 बीआरटीएफ (BRTF) सुराईथोटा की ओर से बनाया गया वैली ब्रिज पूरी तरह बह गया। इस दौरान कई वाहन भी इसकी चपेट में आए। इस तेज बहाव में एक BRO कर्मचारी के बह जाने की भी सूचना सामने आई है। कर्मचारी की तलाश में SDRF और NDRF समेत राहत एवं बचाव टीमें जुटी हैं। वही, मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

कुछ ही पलों में मच गई भारी तबाही

प्रत्यक्ष स्थिति के अनुसार तेज पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा भी नाले में आया। देखते ही देखते पानी ने आसपास के क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। वैली ब्रिज पानी के तेज बहाव को नहीं झेल सका और बह गया। घटना में GREF का स्कॉर्पियो वाहन और बोलेरो कैंपर समेत एक अन्य वाहन भी तेज बहाव की चपेट में आए।

एक दर्जन गांवों का संपर्क प्रभावित

ब्रिज टूटने के बाद नीती घाटी की ओर जाने वाली आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। जुम्मा, नीती और सीमा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों का सड़क संपर्क भी बाधित हुआ है। यह पुल सीमांत इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। कुछ साल पहले पुल टूटने के बाद सीमा सड़क संगठन ने बेली ब्रिज का निर्माण कराया था। अब इसके बहने के बाद BRO की ओर से यातायात बहाल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू किया गया है।

BRO कर्मचारी की तलाश जारी

ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि उनकी BRO के मेजर से फोन पर बातचीत हुई है। मेजर की ओर से एक कर्मचारी के लापता होने की जानकारी दी गई है। अचानक बढ़े पानी के बाद कर्मचारी का पता नहीं चल पाया। आशंका है कि वह तेज बहाव में बह गया हो।

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि एक ब्रिज, एक गाड़ी, एक ट्रक और हवलदार रैंक के कर्मचारी के बहने की सूचना है। बाकी कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

सुरक्षा को देखते हुए सुरईथोटा से तमक और मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। धौली गंगा और अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

SDRF-NDRF की टीमें सक्रिय

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF और NDRF की टीमें सक्रिय हो गईं। भारी बारिश और अंधेरा होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। लापता कर्मचारी की तलाश के लिए अभियान जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से जानकारी ली। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने और प्रभावित मार्ग पर आवाजाही रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गांवों में राशन, खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है।

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