मऊ में दवा सेल्स कर्मचारियों ने सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को 30 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी समस्याओं के समाधान की मांग की गई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई नियोक्ताओं द्वारा सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों का अवैध स्थानांतरण, काम रोकने और नौकरी से बर्खास्त करने जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने वेतन और यात्रा खर्च के भुगतान में भी अनियमितता का आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना था कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता है और झूठी पुलिस शिकायतों के जरिए उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जाता है। ज्ञापन में चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने और बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 सहित मौजूदा श्रम कानूनों को जारी रखने की मांग की गई। साथ ही, निश्चित अवधि के रोजगार पर नियुक्ति रोकने और कर्मचारियों की छंटनी, अवैध स्थानांतरण तथा सेवा समाप्ति पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। ट्रैकिंग पर रोक लगाने की मांग प्रदर्शनकारियों ने सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 42 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन की मांग की, जिसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की बात कही गई। उन्होंने EPS पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम 9 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित करने की भी मांग की। आठ घंटे का कार्यदिवस लागू करने तथा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से कर्मचारियों की निगरानी और ट्रैकिंग पर रोक लगाने की मांग भी इसमें शामिल थी। कर्मचारियों ने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम और कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने की मांग की। बोनस का भुगतान, चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने और बढ़ती ईंधन कीमतों के अनुसार दैनिक व यात्रा भत्ते में वृद्धि की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। ज्ञापन में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी शून्य करने, आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने तथा दवाओं की ऑनलाइन बिक्री बंद करने की मांग भी की गई। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5 प्रतिशत बजट आवंटित करने की मांग भी रखी गई। विभिन्न कन्वेंशन को मंजूरी देने की मांग कर्मचारियों ने अस्पतालों और संस्थानों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के काम करने पर प्रतिबंध वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि काम करने के कारण मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को आपराधिक मामलों में फंसाकर जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सभी फसलों पर C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP और सुनिश्चित खरीद, स्वच्छ पेयजल,स्वच्छता तथा सम्मानजनक आवास की व्यवस्था की मांग की। इसके अलावा श्रम न्यायालयों में नियुक्तियां, 1 मई को मजदूर दिवस का अवकाश और ILO के विभिन्न कन्वेंशन को मंजूरी देने की मांग भी की गई। कर्मचारियों ने श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई और उचित सजा की मांग करते हुए कहा कि सरकार उनकी सभी मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप करे और सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों को राहत प्रदान करे।

