सावन सोमवार पर संभल के शिवालयों में उमड़ी भीड़:बाहर से कराया जलाभिषेक, 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे

सावन सोमवार पर संभल के शिवालयों में उमड़ी भीड़:बाहर से कराया जलाभिषेक, 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे

संभल की कल्कि नगरी में सावन माह के दूसरे सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह 4 बजे से ही मंदिरों में दर्शन शुरू हो गए, जहां भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की।ब्लॉक बहजोई क्षेत्र के गांव सादातबाड़ी स्थित प्राचीन श्रीपातालेश्वर महादेव मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई। मंदिर भवन के अंदर जगह कम होने के कारण, स्टील की पनारी लगाकर श्रद्धालुओं को बाहर से ही शिवलिंग पर जलाभिषेक और दूधाभिषेक कराया गया। संभल के प्रमुख शिवालयों में थाना हयातनगर के सिद्धपीठ श्रीपातालेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। संभल के सीओ कुलदीप कुमार ने भी शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। अन्य प्रमुख मंदिरों में संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र का श्रीकृष्णेश्वर नाथ महादेव सूर्यकुंड मंदिर, थाना नखासा क्षेत्र के गांव फतेहपुर भाऊ का श्रीप्रकेटेश्वर महादेव मंदिर और तहसील चंदौसी के थाना कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव रतनपुर बनी स्थित पांचवीं सदी का शिव मंदिर शामिल रहे। इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। श्रद्धालु राहुल शर्मा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने यहां आकर जलाभिषेक किया था, जिसके बाद इस मंदिर का नाम श्रीकृष्णेश्वर महादेव मंदिर पड़ा और इसे सूर्यकुंड के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु सीमा आर्या ने कहा कि यह एक सिद्धपीठ है, जहां हर मनोकामना पूरी होती है। यह बहुत प्राचीन मंदिर है और मान्यता है कि संतानहीन दंपतियों को यहां प्रार्थना करने से संतान सुख प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि महिलाएं 7 या 21 दिन का प्रण लेती हैं और अखंड ज्योति जलाती हैं। मंदिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक भी किया जा रहा है।श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए जिला मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सभी प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं, साथ ही सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। शाम तक पांच लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। सावन माह की शिव तेरस के लिए कांवड़ लेने हेतु श्रद्धालु हरिद्वार और गंगोत्री के लिए रवाना हो गए हैं।

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