सावन के दूसरे सोमवार पर रायसेन जिले में बारिश के बीच भगवान शिव की भक्ति का अलग ही उत्साह देखने को मिला। सुबह से हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु जिले के अलग-अलग शिव मंदिरों में पहुंचे। भक्तों ने भगवान शिव का अभिषेक किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती उतारी। मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। भोजपुर के विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर में विशाल शिवलिंग का भव्य श्रृंगार किया गया। वहीं रायसेन किले की पहाड़ी पर स्थित सोमेश्वर धाम में भी बारिश के बीच श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे। 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर महादेव भोजपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया गया। विशाल शिवलिंग को करीब 6 क्विंटल फूलों से सजाया गया। भगवान भोजेश्वर का श्रृंगार त्रिशूल और डमरू के स्वरूप में किया गया, जो मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। फूलों से सजे भगवान भोजेश्वर के दर्शन के लिए भक्तों में खासा उत्साह दिखाई दिया। महंत ने किया रुद्रमहाभिषेक भोजेश्वर महादेव मंदिर में महंत पवन गिरि महाराज ने भगवान शिव का रुद्रमहाभिषेक किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। रुद्रमहाभिषेक के दौरान भगवान शिव से विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई। सावन सोमवार के चलते मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और भक्तों ने भगवान भोजेश्वर के दर्शन कर सुख-शांति की कामना की। बरसते पानी में सोमेश्वर धाम पहुंचे श्रद्धालु रायसेन किले की पहाड़ी पर स्थित सोमेश्वर धाम में भी सावन के दूसरे सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां सुबह 6 बजे से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बारिश लगातार होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। भक्तों ने भगवान शिव का अभिषेक किया और आरती उतारी। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। गेट बंद रहा तो पाइप से किया अभिषेक सोमेश्वर धाम में बारिश के बीच भगवान शिव के दर्शन और अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। गेट बंद होने के कारण कुछ श्रद्धालुओं ने पाइप के सहारे भगवान शिव का अभिषेक किया। बारिश के बीच श्रद्धालुओं का यह भक्ति भाव देखने को मिला। लोगों ने भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाए और पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना की। सोमेश्वर धाम तक निकाली भक्ति यात्रा सावन सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सोमेश्वर धाम तक यात्रा भी निकाली। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालु भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए धाम तक पहुंचे। धाम पहुंचने के बाद भक्तों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और आरती में शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं की आस्था सावन के दूसरे सोमवार पर रायसेन जिले में बारिश के बावजूद शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। सुबह से ही लोग पूजा की तैयारी के साथ मंदिरों में पहुंचते रहे। कई जगहों पर बारिश के बीच ही श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया। मंदिरों में पूजा-अर्चना और आरती के साथ हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते रहे। यशवंत नगर में चल रहा शिव महारुद्राभिषेक यशवंत गार्डन, यशवंत नगर में श्री सिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर समिति की ओर से 7 से 11 अगस्त तक शिव महारुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के तहत रोजाना अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसमें कलश स्थापना, रुद्री निर्माण, रुद्राभिषेक और महाआरती शामिल हैं। सावन के पवित्र महीने में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। रोज हो रहे धार्मिक आयोजन शिव महारुद्राभिषेक के दौरान मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। श्रद्धालु कलश स्थापना और रुद्री निर्माण के बाद रुद्राभिषेक में शामिल हो रहे हैं। इसके बाद महाआरती की जाती है। 11 अगस्त तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। सावन के दूसरे सोमवार पर भी यहां भक्तों ने भगवान सिद्ध नागेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की। शिवालयों में गूंजते रहे हर-हर महादेव के जयकारे सावन के दूसरे सोमवार पर रायसेन जिले के अलग-अलग शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। बारिश के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए मंदिरों तक पहुंचे। कहीं फूलों से भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया गया तो कहीं रुद्रमहाभिषेक और महाआरती के आयोजन हुए। पूरे जिले में सावन सोमवार पर भगवान भोलेनाथ की भक्ति का माहौल दिखाई दिया और शिवालय हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजते रहे।

