Iraq Saudi US Strikes: US-सऊदी हमलों के बाद इराकी गुट ने दी ‘मिसाइल के बदले मिसाइल’ की खुली चेतावनी

Iraq Saudi US Strikes: US-सऊदी हमलों के बाद इराकी गुट ने दी ‘मिसाइल के बदले मिसाइल’ की खुली चेतावनी

Iraq revenge Attack Threat: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है, जहां अमेरिका और सऊदी अरब के हालिया हवाई हमलों ने प्रतिशोध की नई आग सुलगा दी है। इराक के प्रमुख हथियारबंद संगठन ने साफ कर दिया है कि वह अपने लड़ाकों की मौत का बदला कूटनीतिक बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों और हथियारों के जरिए लेगा। ‘आग का जवाब आग से देने’ की इस खुली धमकी ने पूरे अरब जगत में एक और विनाशकारी क्षेत्रीय संघर्ष के मुहाने पर खड़े होने की आशंका पैदा कर दी है।

Iraq Saudi US strikes: इराक ने दी बदले की धमकी

इराक के प्रभावशाली हथियारबंद संगठन ‘हरकत हिजबुल्लाह अल-नुजबा’ के प्रमुख अकरम अल-काबी ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए सऊदी अरब और अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का संकल्प दोहराया है। अल-काबी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रियाद के साथ कूटनीतिक बातचीत का अब कोई औचित्य नहीं बचा है और वह पूरी तरह निरर्थक साबित हुई है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि “सऊदी अरब को केवल एक सटीक सैन्य कार्रवाई के जरिए ही सीधा किया जा सकता है। मिसाइलों का मुकाबला केवल मिसाइलों से ही होगा और आग का जवाब केवल आग से दिया जाएगा।”

क्या था पूरा मामला और कितना हुआ नुकसान?

दरअसल, यह पूरा विवाद पिछले महीने अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी अरब द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद गहराया है। इन हमलों में इराक के आधिकारिक अर्धसैनिक बल ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज’ (PMF) के ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

संगठन के अनुसार, इस घातक बमबारी में कम से कम 20 लड़ाके मारे गए थे, जबकि 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।

दूसरी ओर, अमेरिकी और सऊदी कमान का दावा है कि ये हमले उन ईरान समर्थित गुटों को निष्क्रिय करने के लिए किए गए थे, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा (तेल) संयंत्रों पर लगातार ड्रोन और रॉकेट हमले कर रहे थे।

बगदाद में कूटनीतिक हलचल और प्रधानमंत्री का रुख

एक तरफ जहां मिलिशिया संगठन युद्ध के मूड में हैं, वहीं इराक सरकार इस तनाव को काबू करने की जद्दोजहद में जुटी है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को बगदाद में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जहां इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सऊदी अरब की खुफिया एजेंसी के प्रमुख खालिद बिन अली अल-हुमैदान से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री अल-जैदी ने दोहराया कि इराक अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने देगा।

हमलों के विरोध में इराकी प्रधानमंत्री ने अपना प्रस्तावित रियाद दौरा रद्द कर दिया था, जिसे लेकर सऊदी खुफिया प्रमुख ने उन्हें एक बार फिर सऊदी अरब आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया है।

क्यों खतरनाक है यह नया टकराव?

विशेषज्ञों का मानना है कि इराक लंबे समय से वाशिंगटन, रियाद और तेहरान के बीच ‘प्रॉक्सी वॉर’ (छद्म युद्ध) का अखाड़ा बना हुआ है।

ईरान समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’: अल-नुजबा जैसे गुट इराक के आधिकारिक सुरक्षा तंत्र (PMF) का हिस्सा होने के साथ-साथ वैचारिक और सामरिक रूप से ईरान के बेहद करीब हैं। यदि यह गुट जवाबी हमला करता है, तो सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों (जैसे अरामको) और लाल सागर के जलमार्गों की सुरक्षा फिर खतरे में पड़ सकती है।

ऊर्जा बाजार पर असर: इस नए तनाव का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ने का खतरा है।

इराक की आंतरिक संप्रभुता: बगदाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह देश के भीतर सक्रिय इन स्वायत्त मिलिशिया गुटों पर अपना नियंत्रण कैसे बनाए रखे, ताकि इराक एक बार फिर विदेशी शक्तियों के सीधे युद्ध का मैदान न बन जाए।

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