छोटे भाई का शव देख फफक कर रो पड़े उमर और अली, पिता अतीक और भाई की कब्र के पास दफन हुआ आबान

छोटे भाई का शव देख फफक कर रो पड़े उमर और अली, पिता अतीक और भाई की कब्र के पास दफन हुआ आबान

Atiq Ahmed Family: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद को शनिवार शाम प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित कब्रिस्तान में उसके पिता, चाचा और भाई की कब्रों के पास सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दो दिनों के लंबे इंतजार के बाद आबान को अंतिम विदाई दी गई। गुरुवार सुबह झांसी में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में आबान और उसके साथी सोनू की मौत हो गई थी। सोनू को शुक्रवार को ही दफना दिया गया था, लेकिन आबान का अंतिम संस्कार उसके बड़े भाइयों के इंतजार में टाल दिया गया था।

चार साल बाद जेल से बाहर आए भाई

लखनऊ और झांसी जेल में बंद बड़े भाई उमर अहमद और अली अहमद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली कुछ घंटों की पैरोल के बाद कड़ी पुलिस सुरक्षा में कब्रिस्तान लाया गया। करीब चार साल बाद जेल से बाहर आए उमर और अली अपने सबसे छोटे भाई आबान का शव देखते ही फफक-फफक कर रो पड़े। दोनों ने भाई अहजम और परिवार के अन्य सदस्यों को गले लगा लिया। इसके बाद करीबियों के साथ कंधा देकर आबान के शव को कब्र तक ले गए।

यह पहला मौका था जब उमर और अली ने अपने पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रों को देखा। वर्ष 2023 में जेल में बंद होने के कारण दोनों उनके जनाजे में शामिल नहीं हो सके थे।

कब्रिस्तान के बाहर हजारों की भीड़

उमर और अली के पहुंचने की खबर फैलते ही कसारी-मसारी कब्रिस्तान के बाहर हजारों लोगों का जमावड़ा लग गया। भीड़ में धक्का-मुक्की और आपाधापी मचने पर पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई बार हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

पैरोल के तहत शनिवार सुबह करीब 10 बजे उमर को लखनऊ और अली को झांसी जेल से प्रिजन वैन में रवाना किया गया था। शाम करीब साढ़े चार बजे उमर और पांच बजे के करीब अली कब्रिस्तान पहुंचे, जिसके बाद शाम छह बजे आबान का शव एंबुलेंस से हटवा गांव से लाया गया।

पुलिस घेरे में एक घंटे की पारिवारिक मुलाकात

जनाजे की नमाज और दफन के बाद कब्रिस्तान की मस्जिद के सामने लगाए गए विशेष टेंट में उमर और अली की उनके भाई अहजम, बुआ परवीन कुरैशी और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कराई गई। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के दौरान पूरे टेंट को पुलिसकर्मियों ने चारों तरफ से घेर रखा था।

काली शीशे वाली कार से बना संशय

कब्रिस्तान के प्रवेश द्वार पर कड़ी पुलिस बैरिकेडिंग और पहचान पत्र की जांच के बीच एक काली फिल्म लगी कार बैरिकेड्स हटाकर अचानक अंदर दाखिल हो गई। पुलिस ने कार का शीशा उतरवाकर चेकिंग तक नहीं की, जबकि परिवार के करीबियों का कहना था कि कार में बुआ बैठी थीं। हालांकि, इस बात को लेकर संशय बना रहा कि कार में असल में कौन सवार था।

शाइस्ता परवीन की मौजूदगी को लेकर उड़ती रहीं अफवाहें

इससे पहले, शुक्रवार को हटवा गांव में शव पहुंचने के बाद से ही उमेश पाल हत्याकांड में वांछित और फरार चल रही अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन के गुपचुप तरीके से आकर बेटे का अंतिम दीदार करने की अफवाहें उड़ती रहीं। हालांकि, पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जांच के बाद ऐसे सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि शाइस्ता के आने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। अतीक की बहन आयशा नूरी और अशरफ की पत्नी जैनब भी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

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