ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) में स्टूडेंट्स को आपदा प्रबंधन के दौरान राहत-बचाव कार्यों की ट्रेनिंग दी जा रही है। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने बताया कि ट्रेंड स्वयंसेवक रोजगार के साथ आपदा के समय लोगों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि ट्रेनिंग में शामिल छात्रों में से 10 प्रतिशत बेस्ट ट्रेनर का ही सिलेक्शन किया जाए, ताकि उनके माध्यम से अन्य छात्रों को भी ट्रेनिंग दी जा सके। दरअसल, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सेल के तत्वावधान में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन’ विषय पर शनिवार से 7 दिवसीय आवासीय ‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। ट्रेनिंग 14 अगस्त तक चलेगी। कुलपति ने कहा कि आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण छात्रों के जीवन में नया आयाम जोड़ेगा। उन्होंने आयोजकों को ट्रेनिंग देने वालों और ट्रेनिंग लेने वालों को ट्रेनिंग के दौरान समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कुलपति ने कहा कि अतिथियों का स्वागत करना मिथिला की परंपरागत संस्कृति का हिस्सा है। चार बैच में 800 स्वयंसेवकों को मिलेगा प्रशिक्षण मुख्य प्रशिक्षक और एसडीआरएफ पटना के हवलदार कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि बिहार बहु-आपदा प्रभावित क्षेत्र है। खासकर मिथिला क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में प्रशिक्षित ‘युवा आपदा मित्र’ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि चार बैच में कुल 800 एनएसएस स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाना बड़ी उपलब्धि होगी। एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरएन चौरसिया ने कहा कि आपदा के समय एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में कुछ घंटे लग सकते हैं। ऐसे में शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ में प्रशिक्षित स्वयंसेवक सबसे पहले बचावकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वैज्ञानिक और संस्थागत तरीके से प्राप्त प्रशिक्षण के जरिए वे आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध करा सकेंगे। डीएसडब्ल्यू एवं प्रभारी कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि प्रशिक्षण से एनएसएस स्वयंसेवकों के आपदा कौशल में वृद्धि होगी। एसडीआरएफ की टीम छात्रों को आपदा से बचाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी, जिससे वे रोजगार के लिए भी अधिक सक्षम बनेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में आपदा प्रबंधन को भी प्रमुख पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है। वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार ने प्रशिक्षण के आयोजन के लिए बिहार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी। उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत और बिहार गीत से हुई। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो, बुके और मिथिला पेंटिंग से किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शबनम कुमारी ने किया। बाढ़ से पहले, दौरान और बाद की सुरक्षा का दिया प्रशिक्षण उद्घाटन के बाद एसडीआरएफ पटना की 10 सदस्यीय टीम ने तकनीकी सत्र में प्रशिक्षण दिया। इसमें बिहार की आपदा संवेदनशीलता, बाढ़ से पहले की तैयारी, बाढ़ के दौरान एवं बाद की सुरक्षा व्यवस्था, डूबने की घटनाओं से बचाव और जीवन रक्षक विधियों की जानकारी दी गई। शाम को प्रशिक्षुओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) में स्टूडेंट्स को आपदा प्रबंधन के दौरान राहत-बचाव कार्यों की ट्रेनिंग दी जा रही है। यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने बताया कि ट्रेंड स्वयंसेवक रोजगार के साथ आपदा के समय लोगों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि ट्रेनिंग में शामिल छात्रों में से 10 प्रतिशत बेस्ट ट्रेनर का ही सिलेक्शन किया जाए, ताकि उनके माध्यम से अन्य छात्रों को भी ट्रेनिंग दी जा सके। दरअसल, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सेल के तत्वावधान में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन’ विषय पर शनिवार से 7 दिवसीय आवासीय ‘युवा आपदा मित्र’ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। ट्रेनिंग 14 अगस्त तक चलेगी। कुलपति ने कहा कि आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण छात्रों के जीवन में नया आयाम जोड़ेगा। उन्होंने आयोजकों को ट्रेनिंग देने वालों और ट्रेनिंग लेने वालों को ट्रेनिंग के दौरान समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कुलपति ने कहा कि अतिथियों का स्वागत करना मिथिला की परंपरागत संस्कृति का हिस्सा है। चार बैच में 800 स्वयंसेवकों को मिलेगा प्रशिक्षण मुख्य प्रशिक्षक और एसडीआरएफ पटना के हवलदार कृष्ण नंदन सिंह ने कहा कि बिहार बहु-आपदा प्रभावित क्षेत्र है। खासकर मिथिला क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में प्रशिक्षित ‘युवा आपदा मित्र’ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि चार बैच में कुल 800 एनएसएस स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाना बड़ी उपलब्धि होगी। एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरएन चौरसिया ने कहा कि आपदा के समय एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में कुछ घंटे लग सकते हैं। ऐसे में शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ में प्रशिक्षित स्वयंसेवक सबसे पहले बचावकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वैज्ञानिक और संस्थागत तरीके से प्राप्त प्रशिक्षण के जरिए वे आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध करा सकेंगे। डीएसडब्ल्यू एवं प्रभारी कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार मेहता ने कहा कि प्रशिक्षण से एनएसएस स्वयंसेवकों के आपदा कौशल में वृद्धि होगी। एसडीआरएफ की टीम छात्रों को आपदा से बचाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगी, जिससे वे रोजगार के लिए भी अधिक सक्षम बनेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में आपदा प्रबंधन को भी प्रमुख पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है। वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार ने प्रशिक्षण के आयोजन के लिए बिहार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी। उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत और बिहार गीत से हुई। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो, बुके और मिथिला पेंटिंग से किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शबनम कुमारी ने किया। बाढ़ से पहले, दौरान और बाद की सुरक्षा का दिया प्रशिक्षण उद्घाटन के बाद एसडीआरएफ पटना की 10 सदस्यीय टीम ने तकनीकी सत्र में प्रशिक्षण दिया। इसमें बिहार की आपदा संवेदनशीलता, बाढ़ से पहले की तैयारी, बाढ़ के दौरान एवं बाद की सुरक्षा व्यवस्था, डूबने की घटनाओं से बचाव और जीवन रक्षक विधियों की जानकारी दी गई। शाम को प्रशिक्षुओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

