Patrika Ground Report: निम्बाहेड़ा में उतरी बजरी, 560 KM दूर भोपाल के नाम कटा रवन्ना; खनिज विभाग भी हैरान

Patrika Ground Report: निम्बाहेड़ा में उतरी बजरी, 560 KM दूर भोपाल के नाम कटा रवन्ना; खनिज विभाग भी हैरान

सुरेश जैन

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में बजरी माफिया की ओर से राजस्व को चूना लगाने का बड़ा मामला सामने आया है। राजस्थान पत्रिका की विशेष पड़ताल में फर्जी ई-रवन्ना के जरिए बजरी के अवैध परिवहन का खेल खेला जा रहा है। माफिया खनिज विभाग की आंखों में धूल झोंक फर्जी दस्तावेजों के सहारे धड़ल्ले से बजरी सप्लाई कर रहे है। पत्रिका के हाथ लगे एक ई-रवन्ना की जब खनिज विभाग के ऑनलाइन सिस्टम से जांचगई, तो वह फर्जी निकली।

चौंकाने वाली बात यह है कि खुद राजस्थान खनिज विभाग के अधिकारी भी यह तय नहीं कर पा रहे कि उनके सिस्टम के समानांतर यह फर्जी रवन्ना आखिर कैसे जनरेट की गई। विभाग यह तथ्य जुटाने में लगा है कि अब तक कितने फर्जी रवन्ना के माध्यम से कितने राजस्व का नुकसान हुआ और इसके पीछे कौन शामिल है।

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27 जुलाई को जारी अधिकृत रवन्ना पर्ची।

यह पूरा मामला

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि रायपुर तहसील के नाथडियास स्थित बजरी लीज से 6 अगस्त को दोपहर 4.40 बजे एक ई-रवन्ना जारी किया गया। जिसके डंपर संख्या आरजे 09 जीसी 6059 है। इसमें 37.8 टन बजरी थी। कागजों में गंतव्य स्थान अयोकी फैब्रिकॉन प्राइवेट लिमिटेड भोपाल जो भीलवाड़ा से 560 किलोमीटर दूर बताया गया। जबकि हकीकत में डंपर भोपाल गया ही नहीं, बल्कि यह बजरी निम्बाहेड़ा में खाली की गई। सिस्टम की एक और बड़ी खामीः डंपर आरजे 09 जीसी 6059 की जांच में एक और बड़ा झोल सामने आया। रिकॉर्ड के मुताबिक, 27 जुलाई के बाद यह डंपर बजरी लेने नाथडियास पहुंचा ही नहीं था। 6 अगस्त को जिस वाहन चालक शंभूलाल के नाम पर यह रवन्ना कटा उसने खुद स्वीकार किया कि 6 अगस्त को वह किसी अन्य वाहन को लेकर निम्बाहेड़ा बजरी खाली करने गया था।

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6 अगस्त को जारी फर्जी रवन्ना पर्ची

पुलिस की लापरवाही

कागजों में डंपर को भोपाल जाना था, लेकिन 6 अगस्त की रात ही बड़‌लियास थाने के बेड़च नाके पर इस वाहन को रोका गया। वहां तैनात पुलिसकर्मी पंकज चौधरी ने रवन्ना चेक किया, लेकिन यह जानने का प्रयास नहीं किया कि नाथडियास से भोपाल जाने वाला वाहन आखिर बेड़च नाके पर क्या कर रहा है? इसी लापरवाही के चलते वाहन आसानी से निकल गया। जब ई-रवन्ने की प्रति पत्रिका टीम के हाथ लगी, तो रू में गड़बड़ी नाथडियास से बेड़च नाके की मौजूदगी देखकर शक हुआ। इसके बाद इसकी गहराई से जांच की गई। खान एवं भूविज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इस ई-रवन्ने की जानकारी चाही गई, तो साइट ने इसे पूरी तरह इनवैलिड बता दिया।

क्यूआर कोड का खेल

जब रवन्ने पर लगे क्यूआर को मोबाइल से स्कैन किया, तो विभाग की साइट खुलने के बजाए एमई-क्यूआर-कॉम’ लिखा हुआ आया। यह एक ऐसी वेबसाइट है जो मुफ्त में फर्जी क्यूआर कोड बनाने की सुविधा देती है। जबकि असली रवन्ने को स्कैन करने पर सीधे खान विभाग की साइट नजर आती है। वही ई-रवन्ना नंबर में भी गड़बड़ी सामने आई है।

आईटी एक्सपर्ट की ले रहे राय

इस मामले की जांच कर रहे हैं। आईटी एक्सपर्ट से राय ले रहे हैं कि यह ई-रन्ना सही है या फर्जी है। फर्जी होने पर पुलिस में मामला दर्ज करवाया जाएगा। वही इसके पीछे कौन है इसका फर्दाफाश किया जाएगा।
-सुनील कुमार सनाढ्य, एएमई, भीलवाड़ा

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