बिहार में भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने घोषणा की है कि राज्यभर में 11 जून से 17 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाकर भूमि से जुड़े लाखों लंबित आवेदनों का निष्पादन किया जाएगा। इस अभियान के तहत राजस्व महा-अभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों की स्कैनिंग, ऑनलाइन अपलोडिंग और उनके निपटारे का काम अभियान मोड में किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की गई है। राजस्व महा-अभियान में मिले थे 46 लाख आवेदन पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 16 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक राजस्व महा-अभियान चलाया था। इस अभियान में कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जो भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। इस दौरान राज्य के सभी अंचलों में विशेष शिविर लगाकर लोगों से भूमि अभिलेखों में त्रुटि सुधार, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण और बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े आवेदन लिए गए थे। 31 मार्च तक पूरा होना था काम, लेकिन कई जिलों में रही सुस्ती मंत्री ने बताया कि, ‘इन आवेदनों की स्कैनिंग, पोर्टल पर अपलोडिंग और समयबद्ध निष्पादन के लिए विभाग ने कई बार दिशा-निर्देश जारी किए थे। सभी मामलों के निपटारे की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई थी, लेकिन कई जिलों में काम अपेक्षित गति से नहीं हो पाया, जिसके कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए।’ स्कैनिंग और अपलोडिंग की स्थिति पर जताई चिंता डॉ. जायसवाल ने कहा कि विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि अब तक कुल आवेदनों में से 81.91 प्रतिशत की ही स्कैनिंग हो पाई है, जबकि मात्र 26.43 प्रतिशत आवेदन संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किए गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि, लाखों रैयतों के आवेदन लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है और इसे हर हाल में दूर किया जाएगा। तीन चरणों में होगा विशेष अभियान का संचालन मंत्री ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान तीन प्रमुख चरणों में काम किया जाएगा। पहले चरण में सभी लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे चरण में सभी आवेदनों को संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में आवेदनों का तेजी से निष्पादन कर लोगों को भूमि संबंधी मामलों में राहत पहुंचाई जाएगी। रविवार को भी खुले रहेंगे कार्यालय उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान 11 जून से 17 जून तक लगातार चलेगा और इस दौरान रविवार को भी कार्य जारी रहेगा। सभी अंचलों को निर्देश दिया गया है कि उपलब्ध मानव संसाधनों और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। विशेष सर्वेक्षण अमीनों की भी ली जाएगी मदद कार्य में तेजी लाने के लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सेवाएं भी ली जाएंगी। शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, जहानाबाद और अरवल को छोड़कर अन्य सभी जिलों के विशेष सर्वेक्षण अमीन स्कैनिंग, अपलोडिंग और निष्पादन कार्य में लगाए जाएंगे। इन पांच जिलों में भूमि सर्वे का कार्य 15 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित होने के कारण वहां के कर्मियों को इस अभियान से अलग रखा गया है। अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि इस अभियान को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं लिया जाए। विशेष शिविर के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना संबंधित अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और समीक्षा की जाएगी तथा प्रगति पर नजर रखी जाएगी। भूमि प्रशासन को पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर सरकार का जोर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार भूमि प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। यह विशेष अभियान लाखों लंबित भूमि मामलों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। बिहार में भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने घोषणा की है कि राज्यभर में 11 जून से 17 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाकर भूमि से जुड़े लाखों लंबित आवेदनों का निष्पादन किया जाएगा। इस अभियान के तहत राजस्व महा-अभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों की स्कैनिंग, ऑनलाइन अपलोडिंग और उनके निपटारे का काम अभियान मोड में किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की गई है। राजस्व महा-अभियान में मिले थे 46 लाख आवेदन पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 16 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक राजस्व महा-अभियान चलाया था। इस अभियान में कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जो भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। इस दौरान राज्य के सभी अंचलों में विशेष शिविर लगाकर लोगों से भूमि अभिलेखों में त्रुटि सुधार, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण और बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े आवेदन लिए गए थे। 31 मार्च तक पूरा होना था काम, लेकिन कई जिलों में रही सुस्ती मंत्री ने बताया कि, ‘इन आवेदनों की स्कैनिंग, पोर्टल पर अपलोडिंग और समयबद्ध निष्पादन के लिए विभाग ने कई बार दिशा-निर्देश जारी किए थे। सभी मामलों के निपटारे की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई थी, लेकिन कई जिलों में काम अपेक्षित गति से नहीं हो पाया, जिसके कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह गए।’ स्कैनिंग और अपलोडिंग की स्थिति पर जताई चिंता डॉ. जायसवाल ने कहा कि विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि अब तक कुल आवेदनों में से 81.91 प्रतिशत की ही स्कैनिंग हो पाई है, जबकि मात्र 26.43 प्रतिशत आवेदन संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किए गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि, लाखों रैयतों के आवेदन लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है और इसे हर हाल में दूर किया जाएगा। तीन चरणों में होगा विशेष अभियान का संचालन मंत्री ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान तीन प्रमुख चरणों में काम किया जाएगा। पहले चरण में सभी लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे चरण में सभी आवेदनों को संबंधित पोर्टलों पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण में आवेदनों का तेजी से निष्पादन कर लोगों को भूमि संबंधी मामलों में राहत पहुंचाई जाएगी। रविवार को भी खुले रहेंगे कार्यालय उन्होंने बताया कि यह विशेष अभियान 11 जून से 17 जून तक लगातार चलेगा और इस दौरान रविवार को भी कार्य जारी रहेगा। सभी अंचलों को निर्देश दिया गया है कि उपलब्ध मानव संसाधनों और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। विशेष सर्वेक्षण अमीनों की भी ली जाएगी मदद कार्य में तेजी लाने के लिए विशेष सर्वेक्षण अमीनों की सेवाएं भी ली जाएंगी। शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, जहानाबाद और अरवल को छोड़कर अन्य सभी जिलों के विशेष सर्वेक्षण अमीन स्कैनिंग, अपलोडिंग और निष्पादन कार्य में लगाए जाएंगे। इन पांच जिलों में भूमि सर्वे का कार्य 15 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित होने के कारण वहां के कर्मियों को इस अभियान से अलग रखा गया है। अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि इस अभियान को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं लिया जाए। विशेष शिविर के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना संबंधित अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और समीक्षा की जाएगी तथा प्रगति पर नजर रखी जाएगी। भूमि प्रशासन को पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर सरकार का जोर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार भूमि प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। यह विशेष अभियान लाखों लंबित भूमि मामलों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


