तीस साल बाद वही सपना उनके 19 वर्षीय बेटे तहसीन मोहम्मद जमशीद ने पूरा कर दिया। तहसीन कतर की 26 सदस्यीय फीफा विश्व कप टीम में जगह बना चुके हैं। विकाश धोरासू के बाद वे दूसरे भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं, जिन्हें विश्व कप खेलने का मौका मिला है। धोरासू 2006 में फ्रांस के लिए खेले थे।
Tahsin Mohammad Jamshid, Qatar football team, FIFA World Cup 2026: जब तहसीन सिर्फ चार साल के थे, तब हर शुक्रवार को दोहा के लोकल स्टेडियम में डग-आउट के पास बैठकर वे अपने अब्बू को फुटबॉल खेलते देखा करते थे। वही उनके लिए फुटबॉल की दुनिया का पहला झरोखा बना।
तहसीन के पिता जमशीद थचनकांडी केरल के कलिकट के रहने वाले हैं। 1996 में पत्नी श्यमा के साथ वे दोहा आ गए और यहां लकड़ी का कारोबार शुरू किया। जमशीद खुद अच्छे फुटबॉलर थे, लेकिन चोट के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। वे याद करते हुए बताते हैं, “शुक्रवार को छुट्टी होती थी। मैं दोस्तों के साथ स्टेडियम जाता। छोटा तहसीन भी साथ आता। बाद में वो खुद कहने लगा मुझे भी ड्रिबल करना सिखाओ। यहीं से उसकी फुटबॉल यात्रा शुरू हुई।”
पिता का अधूरा सपना
जमशीद 1992 में भारत की यूथ टीम के कैंप के लिए चुने गए थे, लेकिन जा नहीं पाए। कलिकट यूनिवर्सिटी को ‘सर आशुतोष मुखर्जी शील्ड’ के लिए उनकी जरूरत थी। डिग्री पूरी करने और जीवन संवारने की मजबूरी में उन्हें कैंप छोड़ना पड़ा। उस दौर में वे केरल के बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमारपॉल एंचेरी जैसे दिग्गजों के साथ खेल चुके थे, लेकिन राष्ट्रीय टीम का सपना उनके हाथ से निकल गया।
अब बेटे ने पूरा किया सपना
तीस साल बाद वही सपना उनके 19 वर्षीय बेटे तहसीन मोहम्मद जमशीद ने पूरा कर दिया। तहसीन कतर की 26 सदस्यीय फीफा विश्व कप टीम में जगह बना चुके हैं। विकाश धोरासू के बाद वे दूसरे भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं, जिन्हें विश्व कप खेलने का मौका मिला है। धोरासू 2006 में फ्रांस के लिए खेले थे।
जमशीद भावुक होते हुए कहते हैं, “जब हमने सर आशुतोष मुखर्जी शील्ड जीती थी, तब लगा था विश्व कप जीत लिया। आज मेरा बेटा कतर के लिए फीफा विश्व कप खेल रहा है, तो सच में लग रहा है कि मेरा सपना पूरा हो गया। यह हमारे पूरे परिवार के लिए बहुत खास पल है।”
दोहा के मैदान से विश्व कप तक का सफर
तहसीन की फुटबॉल यात्रा शेख फैसल बिन कासिम स्पोर्ट्स अकादमी से शुरू हुई। 2017 में वे अल-दुहैल क्लब की सब-जूनियर टीम में शामिल हुए और फिर कतर की मशहूर एस्पायर एकेडमी में दाखिला मिला, जहां आजकल की राष्ट्रीय टीम के ज्यादातर खिलाड़ी तैयार होते हैं।
क्लब की बस सुबह उन्हें ले जाती और शाम को घर छोड़ जाती। घर पर भी तहसीन का एक ही राग था — फुटबॉल। वे फॉरवर्ड के अलावा लेफ्ट और राइट विंगर की भूमिका में भी खेलते थे। अल्जीरिया के दो कोचों ने उनकी अटैकिंग रनिंग, मूवमेंट और एंगल्स पर खास काम किया।
2023 में उन्होंने अंडर-17 और 2024 में अंडर-19 टीम के लिए डेब्यू किया। 2024 में अल-दुहैल की सीनियर टीम में प्रोफेशनल डेब्यू किया और कुछ ही महीनों बाद सीनियर राष्ट्रीय टीम में बुलावा आ गया। सिर्फ 17 साल 11 महीने की उम्र में उन्होंने सितंबर 2024 में अफगानिस्तान के खिलाफ विश्व कप क्वालीफायर में शुरुआती इलेवन में जगह बनाई। उसी क्वालीफायर में कतर का मुकाबला भारत से भी हुआ था।
अब विश्व कप में उतरेंगे
तहसीन अब कतर की सीनियर टीम के लिए फ्रेंडली मैच भी खेल चुके हैं। 13 जून को सैन फ्रांसिस्को में स्विट्जरलैंड के खिलाफ कतर अपना विश्व कप अभियान शुरू करेगा। इसके बाद कनाडा और बोस्निया-हर्जेगोविना से मुकाबले हैं। जमशीद बताते हैं, “केरल से बहुत सारे मैसेज और फोन आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि तहसीन के लिए दुआ करेंगे।”
तहसीन का जन्म दोहा में हुआ और वे वहीं बड़े हुए। उनके पास भारतीय पासपोर्ट भी है, लेकिन वे भारत में कभी नहीं रहे। अगले साल उन्हें पासपोर्ट चुनना होगा। जमशीद कहते हैं, “संभवतः वे कतर पासपोर्ट ही चुनेंगे।” 2022 विश्व कप के दौरान तहसीन स्टैंड से मैच देख रहे थे। क्रिस्टियानो रोनाल्डो उनके बड़े फैन हैं। इस बार वो खुद मैदान पर उतरेंगे। 13 जून को सैन फ्रांसिस्को में तहसीन मोहम्मद जमशीद का विश्व कप सपना सच हो जाएगा।
Sports – Patrika | CMS


