पूर्णिया यूनिवर्सिटी में छात्र नेता अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। इनका कहना है कि नामांकन आवेदन शुल्क की ऊंची दरों, छात्र हितों की लगातार अनदेखी और विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ ये आंदोलन कर रहे हैं। छात्र नेता पियूष पूजारा की अगुवाई में दर्जनों छात्र आज स्थानीय थाना चौक स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की जेब पर डाका डालना बंद नहीं करता, तब तक यह अनशन खत्म नहीं होगा। महापुरुषों को नमन कर शुरू हुआ आंदोलन अनशन की शुरुआत से पहले छात्र नेता पियूष पूजारा और उनके सहयोगियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान छात्रों ने देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए छात्र अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। करोड़ों रुपये की ‘अवैध’ वसूली का आरोप छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर वित्तीय अनियमितता और बिना सेवा दिए छात्रों से करोड़ों रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। छात्र संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के शुरुआती दौर में 600 रुपये आवेदन शुल्क इसलिए तय किया गया था, क्योंकि तब नामांकन से पहले बकायदा ‘प्रवेश परीक्षा’ (Entrance Exam) आयोजित की जाती थी। परीक्षा के आयोजन, प्रश्न पत्र छपाई और मूल्यांकन के खर्च को देखते हुए यह शुल्क तार्किक था। लेकिन बाद में विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया। अब छात्रों के मेरिट के आधार पर सीधे दाखिला लिया जाता है। प्रवेश परीक्षा बंद होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने आवेदन शुल्क में एक रुपये की भी कटौती नहीं की, जो कि सीधे तौर पर छात्रों से लूट है। छात्र नेताओं के अनुसार, प्रवेश परीक्षा बंद होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले सात साल में आवेदन शुल्क के नाम पर छात्रों की जेब से 20 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि वसूली है, जिसका कोई तार्किक औचित्य नहीं है। छात्र नेता पीयूष पुजारा ने कहा है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय अब शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि छात्रों के शोषण का केंद्र बनता जा रहा है। जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी जायज मांगों पर सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं लेता, तब तक यह अनिश्चितकालीन अनशन और आंदोलन जारी रहेगा। पूर्णिया यूनिवर्सिटी में छात्र नेता अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। इनका कहना है कि नामांकन आवेदन शुल्क की ऊंची दरों, छात्र हितों की लगातार अनदेखी और विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ ये आंदोलन कर रहे हैं। छात्र नेता पियूष पूजारा की अगुवाई में दर्जनों छात्र आज स्थानीय थाना चौक स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की जेब पर डाका डालना बंद नहीं करता, तब तक यह अनशन खत्म नहीं होगा। महापुरुषों को नमन कर शुरू हुआ आंदोलन अनशन की शुरुआत से पहले छात्र नेता पियूष पूजारा और उनके सहयोगियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान छात्रों ने देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए छात्र अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। करोड़ों रुपये की ‘अवैध’ वसूली का आरोप छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर वित्तीय अनियमितता और बिना सेवा दिए छात्रों से करोड़ों रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। छात्र संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के शुरुआती दौर में 600 रुपये आवेदन शुल्क इसलिए तय किया गया था, क्योंकि तब नामांकन से पहले बकायदा ‘प्रवेश परीक्षा’ (Entrance Exam) आयोजित की जाती थी। परीक्षा के आयोजन, प्रश्न पत्र छपाई और मूल्यांकन के खर्च को देखते हुए यह शुल्क तार्किक था। लेकिन बाद में विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया। अब छात्रों के मेरिट के आधार पर सीधे दाखिला लिया जाता है। प्रवेश परीक्षा बंद होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने आवेदन शुल्क में एक रुपये की भी कटौती नहीं की, जो कि सीधे तौर पर छात्रों से लूट है। छात्र नेताओं के अनुसार, प्रवेश परीक्षा बंद होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले सात साल में आवेदन शुल्क के नाम पर छात्रों की जेब से 20 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि वसूली है, जिसका कोई तार्किक औचित्य नहीं है। छात्र नेता पीयूष पुजारा ने कहा है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय अब शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि छात्रों के शोषण का केंद्र बनता जा रहा है। जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन हमारी जायज मांगों पर सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं लेता, तब तक यह अनिश्चितकालीन अनशन और आंदोलन जारी रहेगा।


