यूपी में आंधी-बारिश में गई 33 की जान, शिवालिक की पहाड़ियों से आई बाढ़ में दुकानें और गाड़ियां बहीं

यूपी में आंधी-बारिश में गई 33 की जान, शिवालिक की पहाड़ियों से आई बाढ़ में दुकानें और गाड़ियां बहीं

UP  Heavy Rain Alert:  नौतपा की भीषण गर्मी से जूझ रहे उत्तर प्रदेश के लोगों को गुरुवार रात मौसम ने कुछ राहत जरूर दी, लेकिन यह राहत कई परिवारों के लिए आफत बन गई। गुरुवार और शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई। कहीं कच्चे मकान ढह गए, तो कहीं पेड़ और बिजली के खंभे गिर पड़े। कई जगह बिजली गिरने से लोगों की जान चली गई। इन हादसों से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अलग-अलग जिलों से अब तक 33 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।

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राजधानी लखनऊ समेत पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में देर रात अचानक मौसम बदला। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन कई जिलों में यह बारिश आफत बनकर बरसी। ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिला, जहां कच्चे मकान और टिनशेड तेज हवाओं की चपेट में आ गए।

बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा मौतें

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर बुंदेलखंड क्षेत्र में देखने को मिला। बांदा और हमीरपुर में तीन-तीन लोगों की मौत हुई, जबकि महोबा और उरई में दो-दो लोगों ने जान गंवाई। तेज आंधी और बिजली गिरने की घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। कई गांवों में पेड़ उखड़ गए और बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ग्रामीणों के मुताबिक देर रात अचानक तेज गर्जना और तूफानी हवाओं ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई परिवार अपने घरों में ही फंस गए। प्रशासन की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

बिजली गिरने से गई कई जानें

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने की घटनाओं ने भी कई परिवारों को उजाड़ दिया। अंबेडकरनगर के केदारनगर क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से इंद्रजीत (50) की मौत हो गई। देवरिया में बिजली गिरने से दो लोगों ने दम तोड़ दिया। आजमगढ़, बलिया और भदोही में भी एक-एक व्यक्ति की जान चली गई। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न होने की अपील की है।

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वाराणसी और कौशांबी में भी हादसे

वाराणसी में आंधी-बारिश के दौरान हुए अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं कौशांबी में चार लोगों ने जान गंवाई। प्रतापगढ़ में एक व्यक्ति की मौत की खबर है। उन्नाव और फतेहपुर में भी एक-एक व्यक्ति की जान गई। रायबरेली में तेज आंधी के दौरान मकान का टिनशेड गिरने से उसके नीचे दबकर शकुंतला (50) की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि तेज हवा के चलते अचानक टिनशेड उड़कर गिर पड़ा और उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला।

सहारनपुर में बाढ़ जैसे हालात

सहारनपुर के सिद्धपीठ शाकंभरी देवी क्षेत्र में हालात सबसे भयावह रहे। शिवालिक पहाड़ियों पर देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। तेज जल प्रवाह की चपेट में आकर दो महिलाओं की मौत हो गई। कई श्रद्धालु और स्थानीय लोग घंटों तक फंसे रहे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने राहत अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं और आवागमन प्रभावित हुआ है।

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पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बढ़ी परेशानी

आंधी के कारण प्रदेशभर में सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। इससे कई जिलों में बिजली आपूर्ति घंटों तक ठप रही। लखनऊ, गाजीपुर, बरेली, मुरादाबाद और मेरठ समेत कई शहरों में बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गाजीपुर में आंधी के दौरान एक विशाल पेड़ दीवार पर गिर पड़ा, जिससे आसपास के घरों को नुकसान पहुंचा। कई जगहों पर सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।

आज फिर भारी बारिश और तूफान का अलर्ट

मौसम विभाग ने शनिवार को भी प्रदेश के 46 जिलों में आंधी-तूफान और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, बरेली, झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है।

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इसके अलावा बांदा, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, शाहजहांपुर, संभल, महोबा और झांसी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है।

मानसून की चाल ने बढ़ाई चिंता

इधर भारतीय मौसम विभाग ने मानसून को लेकर भी नई जानकारी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मानसून पिछले पांच दिनों से श्रीलंका के तटीय क्षेत्र में अटका हुआ है और इसके केरल पहुंचने में करीब सात दिन की देरी हो सकती है। मौसम विज्ञान के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इस बार देश में सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश होने का अनुमान है। विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है। हालांकि इसमें चार प्रतिशत तक का अंतर हो सकता है।

किसानों की बढ़ी चिंता

मानसून में संभावित देरी और कम बारिश के अनुमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता उन्हें परेशान कर रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून देर से आता है तो धान और अन्य खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर अचानक हो रही आंधी और बारिश से खेतों में तैयार खड़ी कुछ फसलों को नुकसान पहुंचने की भी खबरें हैं। कई जिलों में आम और सब्जियों की फसल को तेज हवाओं से नुकसान पहुंचा है।

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राहत और बचाव कार्य जारी

प्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग की टीमें बिजली आपूर्ति बहाल करने में लगी हैं, जबकि आपदा राहत बल प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जाए और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जाए।

मौसम की मार से सहमा प्रदेश

नौतपा की तपती गर्मी के बीच आई यह आंधी-बारिश प्रदेश के लोगों के लिए राहत और आफत दोनों बनकर आई। एक ओर तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज तूफान और बिजली गिरने की घटनाओं ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। फिलहाल मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों को बेहद संवेदनशील बताया है। ऐसे में प्रशासन और लोगों दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी हो गया है। प्रदेशभर में लोग अब आसमान की ओर टकटकी लगाए मौसम के अगले मिजाज का इंतजार कर रहे हैं।

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