अररिया में PMFME योजना से सुनील ने खोला मूढ़ी फैक्टरी:मासिक आय 50 हजार, 25 युवाओं को दिया रोजगार

अररिया में PMFME योजना से सुनील ने खोला मूढ़ी फैक्टरी:मासिक आय 50 हजार, 25 युवाओं को दिया रोजगार

अररिया के बैद्यनाथपुर वार्ड संख्या-5, गिदरिया निवासी सुनील कुमार साह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) का लाभ उठाकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। आज वे न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव के 25 युवाओं को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में उन्हें इस स्वरोजगार से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपए की आय हो रही है। सुनील कुमार साह ने उद्योग विभाग, अररिया के माध्यम से PMFME योजना के तहत पांच लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग कर उन्होंने अपने गांव में ही एक आधुनिक मूढ़ी फैक्टरी स्थापित की। फैक्टरी शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार आया। अनुदान मिलने से वित्तीय बोझ हुआ कम सुनील बताते हैं कि पहले वे रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने की सोच रहे थे। केंद्र सरकार की इस योजना ने उनकी स्थिति में बदलाव लाया। उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान मिलने से वित्तीय बोझ काफी कम हुआ, जिससे बाकी राशि चुकाना आसान हो गया। यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी मदद और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। सुनील की सफलता इस योजना का एक जीता-जागता उदाहरण है। उनकी फैक्टरी न सिर्फ स्थानीय स्तर पर मूढ़ी का उत्पादन कर रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आपूर्ति करती है।
25 युवाओं को दिया जाएगा रोजगार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुनील की फैक्टरी ने गांव के 25 युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराया है। इससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी है और पलायन की दर भी कम हुई है। सुनील ने कहा, “अब मेरे गांव के लड़के बाहर नहीं जा रहे।” यहां काम कर घर-परिवार संभाल रहे हैं। उन्होंने अन्य युवाओं से अपील की है कि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर बनें। सुनील की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं। जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने भी सुनील की सराहना की और बताया कि योजना के तहत अररिया में कई अन्य इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। सुनील कुमार साह की कहानी साबित करती है कि सही दिशा और सरकारी सहयोग से गांव में भी बड़ा उद्यम खड़ा किया जा सकता है। उनकी मेहनत और संकल्प न सिर्फ उनकी जिंदगी, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर बदल रहा है। अररिया के बैद्यनाथपुर वार्ड संख्या-5, गिदरिया निवासी सुनील कुमार साह ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) का लाभ उठाकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। आज वे न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव के 25 युवाओं को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में उन्हें इस स्वरोजगार से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपए की आय हो रही है। सुनील कुमार साह ने उद्योग विभाग, अररिया के माध्यम से PMFME योजना के तहत पांच लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग कर उन्होंने अपने गांव में ही एक आधुनिक मूढ़ी फैक्टरी स्थापित की। फैक्टरी शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार आया। अनुदान मिलने से वित्तीय बोझ हुआ कम सुनील बताते हैं कि पहले वे रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने की सोच रहे थे। केंद्र सरकार की इस योजना ने उनकी स्थिति में बदलाव लाया। उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान मिलने से वित्तीय बोझ काफी कम हुआ, जिससे बाकी राशि चुकाना आसान हो गया। यह योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत उद्यमियों को वित्तीय सहायता, तकनीकी मदद और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। सुनील की सफलता इस योजना का एक जीता-जागता उदाहरण है। उनकी फैक्टरी न सिर्फ स्थानीय स्तर पर मूढ़ी का उत्पादन कर रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आपूर्ति करती है।
25 युवाओं को दिया जाएगा रोजगार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुनील की फैक्टरी ने गांव के 25 युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराया है। इससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी है और पलायन की दर भी कम हुई है। सुनील ने कहा, “अब मेरे गांव के लड़के बाहर नहीं जा रहे।” यहां काम कर घर-परिवार संभाल रहे हैं। उन्होंने अन्य युवाओं से अपील की है कि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर बनें। सुनील की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं। जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने भी सुनील की सराहना की और बताया कि योजना के तहत अररिया में कई अन्य इकाइयां स्थापित हो रही हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। सुनील कुमार साह की कहानी साबित करती है कि सही दिशा और सरकारी सहयोग से गांव में भी बड़ा उद्यम खड़ा किया जा सकता है। उनकी मेहनत और संकल्प न सिर्फ उनकी जिंदगी, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर बदल रहा है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *