Gurugram Suicide Case : हरियाणा के गुरुग्राम में एक सुपरवाइजर पर एक कर्मचारी ने बेहद शर्मनाक और गंभीर आरोप लगाकर अपनी दे दी। दरअसल, उसका आरोप है कि सुपरवाइजर उसे ब्लैकमेल कर लगातार शारीरिक संबंध बनाने पर मजबूर करता है। सुसाइड नोट में लिखा है कि जब वह दूसरी जगह रहने गया, तो मुझसे रुपयों और लड़कियों की मांग करने लगा। जब मैंने मना किया, तो उसने कहा कि लड़की नहीं ला सकते तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो।
आपको बता दें कि यह दिल दहला देने वाला दर्द बिहार के बेगूसराय के रहने वाले रामपुकार यादव का है, जिसने गुरुग्राम (गुड़गांव) में कंपनी के सुपरवाइजर की घिनौनी डिमांड और मानसिक प्रताड़ना से टूटकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत को गले लगाने से महज 15 मिनट पहले रामपुकार ने अपने भाई और भांजे को वॉट्सएप पर 8 पन्नों का एक खौफनाक सुसाइड नोट भेजा था, जिसमें उसने अपनी आपबीती बयां की है।
8 पन्नों के सुसाइड नोट में बयां की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां
मूल रूप से बेगूसराय के गढ़पुरा थाना क्षेत्र के रक्सी गांव का रहने वाला रामपुकार यादव जनवरी 2022 से गुरुग्राम के उद्योग विहार फेज-II (सेक्टर-20) स्थित एक कंपनी में कार्यरत था। उसकी पत्नी और इकलौता बेटा गांव में ही रहते थे। रामपुकार ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि कंपनी का सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार उसे पिछले 3 साल से प्रताड़ित कर रहा था। शुरुआत में दोनों एक ही कमरे में रहते थे। रामपुकार ने बताया, ‘मैं शराब नहीं पीता था। एक दिन देवेंद्र ने मुझे कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पिला दी। जब मैं बेसुध हो गया, तो उसने मेरे साथ कुकर्म (जबरन शारीरिक संबंध) किया। जब मैंने अगले दिन विरोध किया, तो वह मुझे ब्लैकमेल करने लगा और फरवरी 2022 से जुलाई 2023 तक लगातार मेरा यौन उत्पीड़न करता रहा।’
पैसों के लिए दी पुलिस से पिटवाने की धमकी
सुसाइड नोट के मुताबिक, जुलाई 2023 में देवेंद्र पालम शिफ्ट हो गया, जिसके बाद उसने रामपुकार से पैसों की डिमांड शुरू कर दी। मना करने पर देवेंद्र धौंस जमाता था कि उसके अंकल हरियाणा पुलिस में हैं और वह उसे पिटवा देगा। डर के मारे रामपुकार उसे हर महीने 10 से 15 हजार रुपये कैश देने लगा।
मैसेज भेजने के 15 मिनट बाद ही लगा ली फांसी
17 मई 2026 की दोपहर करीब 12 बजे रामपुकार ने अपने बड़े भाई पंकज कुमार और भांजे पप्पू कुमार के वॉट्सएप पर 8 पन्नों का सुसाइड नोट भेजा। करीब 15 मिनट बाद जब परिजनों ने मैसेज देखा, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत रामपुकार के पड़ोस में रहने वाले एक शख्स को कमरे पर भेजा। कमरा अंदर से बंद था। आवाज देने पर जब कोई जवाब नहीं मिला, तो दरवाजा तोड़ा गया, जहां अंदर पंखे के फंदे से रामपुकार की लाश लटक रही थी।
दिल्ली-गुरुग्राम पुलिस पर लापरवाही का आरोप
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले रिश्तेदारों में भारी आक्रोश है। परिजनों का आरोप है कि आत्महत्या के 30 घंटे बाद तक पुलिस ने आरोपी सुपरवाइजर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। रिश्तेदारों ने बताया कि रविवार होने की बात कहकर पुलिस ने शव को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (हरिनगर) के शवगृह में रखवा दिया। सोमवार को भी पोस्टमार्टम और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में टालमटोल की गई। पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि पहले अंतिम संस्कार कर लो, फिर आगे देखेंगे। पुलिस के इस ढुलमुल रवैये और शव की स्थिति बिगड़ती देख, परिजन बिना एफआईआर दर्ज कराए ही शव को लेकर बेगूसराय (बिहार) अपने गांव लौट आए।
पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले पर कापसहेड़ा थाना प्रभारी (SHO) नवीन कुमार का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। सुसाइड नोट और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


