Extreme Heat Effects on Lungs: गर्मी का मौसम हर किसी के लिए परेशानी लेकर आता है, लेकिन अस्थमा, एलर्जी या सीओपीडी जैसी सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक तेज गर्मी, उमस, धूल, प्रदूषण और स्मॉग फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत बढ़ सकती है।
इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. टी. पी. शर्मा का कहना है कि गर्म मौसम सिर्फ शरीर का तापमान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि फेफड़ों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। ऐसे में शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे सांस तेज चलने लगती है।
उमस और प्रदूषण बढ़ा रहे खतरा
डॉ. शर्मा के मुताबिक उमस भरी हवा में ऑक्सीजन कम महसूस होती है और सांस भारी लगने लगती है। इसके अलावा गर्मी के दौरान हवा में प्रदूषण, धूल और परागकण भी बढ़ जाते हैं, जो सांस की नलियों में सूजन पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों में खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
शरीर देता है ये Warning Signs
- बार-बार सांस फूलना
अगर थोड़ी देर चलने पर भी सांस तेजी से फूलने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें।
- सीने में जकड़न
सीने में दबाव या भारीपन फेफड़ों पर बढ़ते तनाव का संकेत हो सकता है।
- लगातार खांसी
गर्मी और प्रदूषण के कारण सूखी या बलगम वाली खांसी बढ़ सकती है।
- घरघराहट की आवाज
सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना अस्थमा का संकेत हो सकता है।
- ज्यादा थकान
फेफड़ों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर जल्दी थकने लगता है।
- होंठ या उंगलियां नीली पड़ना
यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
- चक्कर या कमजोरी
हीट स्ट्रोक और ऑक्सीजन की कमी दोनों ही इसकी वजह बन सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
डॉ. शर्मा के मुताबिक बुजुर्ग, छोटे बच्चे, धूम्रपान करने वाले, हार्ट मरीज और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोग ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
फेफड़ों को कैसे बचाएं?
- दोपहर 11 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
- खूब पानी और तरल पदार्थ पिएं
- धूल और प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनें
- घर को ठंडा और हवादार रखें
- ज्यादा मेहनत वाले काम गर्मी में न करें
- इनहेलर या दवाइयां समय पर लेते रहें
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, सीने में दर्द बढ़ जाए, लगातार खांसी आए या मरीज ठीक से बोल भी न पा रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के दौर में फेफड़ों की देखभाल करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। समय रहते सावधानी बरतने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


