Amblyopia Signs: अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि बच्चा टीवी के पास बैठ रहा है या आंख मिचकाकर देख रहा है, तो शायद आदतन करना रहा होगा/होगी। लेकिन कई बार ये छोटे-छोटे संकेत आंखों की बीमारी की ओर इशारा करते हैं। इसे आम भाषा में लेजी आई (Lazy Eye) भी कहा जाता है।
हाल ही में National Institutes of Health (NIH) की एक रिसर्च में बच्चों में एम्ब्लियोपिया (Amblyopia) की जल्दी पहचान पर जोर दिया गया है। आइए आई स्पेशलिस्ट डॉ. हेमलता यादव से पत्रिका के साथ बातचीत में इससे जुड़ी निम्नलिखित बातें बताई हैं:
क्या होता है एम्ब्लियोपिया?
एम्ब्लियोपिया (Amblyopia) ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे की एक आंख कमजोर हो जाती है। आंख देखने में सामान्य लग सकती है, लेकिन दिमाग उस आंख से आने वाली तस्वीर को सही तरह से इस्तेमाल नहीं करता। धीरे-धीरे बच्चा एक आंख पर ज्यादा निर्भर होने लगता है और दूसरी आंख की रोशनी कमजोर पड़ सकती है। यह बीमारी ज्यादातर बचपन में शुरू होती है।
किन कारणों से होता है Amblyopia?
- दोनों आंखों के नंबर में ज्यादा फर्क होना।
- आंखों का टेढ़ापन।
- जन्म से मोतियाबिंद या पलकों का झुकना।
- समय पर आंखों की जांच न होना।
- बच्चे का एक आंख से कम दिखना लेकिन बता न पाना।
Amblyopia के लक्षण क्या होते हैं?
- टीवी या मोबाइल बहुत पास से देखना।
- एक आंख मिचकाकर चीजें देखना।
- बार-बार सिर तिरछा करके देखना।
- एक आंख बंद करके देखने की आदत।
- पढ़ाई में दिक्कत या चीजें साफ न दिखना।
- आंखों का इधर-उधर घूमना या सीधा न दिखना।
इससे बचने के उपाय क्या हैं?
आंखों की समय-समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है। खासकर 3 से 5 साल की उम्र के बीच आंखों की स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए। अगर कोई समस्या मिलती है तो डॉक्टर चश्मा, आई पैच या खास आई ड्रॉप्स की मदद से इलाज शुरू कर सकते हैं।
साथ ही बच्चे को लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचाना और पढ़ते समय सही दूरी रखना भी जरूरी है। जल्दी पहचान होने पर इस बीमारी को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


