Bundi : ग्राम पंचायतों के मास्टर प्लान में जनता तय करेगी गांवों का भविष्य

बूंदी. वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प के तहत अब गांवों के विकास की तस्वीर खुद ग्रामीण तय करेंगे। मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान के अंतर्गत हर ग्राम पंचायत का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें आमजन की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। पंचायतों के विकास से जुड़े प्रस्ताव अब केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गांव के लोग ही अपनी जरूरतों और अपेक्षाओं को सामने रखकर भविष्य की दिशा तय करेंगे। सरकार की ओर से इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई है। इसमें 19 से अधिक विभागों को जोड़ा गया है। ग्राम विकास अधिकारियों को विशेष फॉर्मेट भेजे गए हैं और वे ग्राम सभाओं में जाकर ग्रामीणों से सुझाव ले रहे हैं। एक प्रपत्र में 298 बिदुओं पर पंचायतों की बेसिक जानकारी जुटाई जा रही है, जबकि 198 बिदुओं पर ग्रामीणों से उनकी अपेक्षाएं और जरूरतें पूछी जा रही हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर सिंचाई तक का बनेगा खाका

अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030, 2035 और 2047 तक गांवों का चरणबद्ध विकास करना है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, पंचायती राज, चिकित्सा सुविधा, कृषि, पशुपालन, जल संसाधन और महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी जरूरतों को चिन्हित किया जा रहा है।। ग्रामीणों से राजस्व ग्राम गठन, पटवार भवन निर्माण, सिंचाई पाइपलाइन, फार्म पौंड, खेतों की तारबंदी, मृदा परीक्षण, पशु चिकित्सालय, उपकेंद्र और भवन मरम्मत जैसी मांगों पर सुझाव लिए जा रहे हैं। इन सुझावों के आधार पर पंचायतों का विकास खाका तैयार होगा।

पोर्टल पर अपलोड होंगे गांवों के सुझाव

ग्राम सभाओं से मिले सभी सुझाव मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इसके बाद राज्य स्तर पर अधिकारियों की ओर से उनकी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी प्रस्ताव में संशोधन की जरूरत होगी तो उसे दोबारा पंचायतों को भेजा जाएगा और अपडेट कर पुन: पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित होगी।

पंचायतों का तैयार होगा डिजिटल डेटाबेस

अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की डायनामिक प्रोफाइल तैयार की जाएगी। पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं का आंकलन कर एक विस्तृत डेटाबेस बनाया जाएगा। इसके आधार पर विकसित राजस्थान ञ्च2047 के लक्ष्य के अनुरूप पंचायतों की विकास प्राथमिकताएं तय होंगी। जिला, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

मास्टर प्लान को तीन हिस्सों में बांटा

अल्पकालीन योजना (2030 तक) :- इसमें गांवों के बुनियादी ढांचे, रखरखाव और वार्षिक बजट प्राथमिकताओं पर ध्यान दिया जाएगा।

मध्यकालीन योजना (2035 तक) :- कृषि विस्तार, सिंचाई और कौशल विकास जैसे मध्य अवधि के लक्ष्यों को शामिल किया जाएगा।
दीर्घकालीन योजना (2047 तक) :- विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप आत्मनिर्भर और सतत ग्राम विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

पंचायतों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर सरकार भविष्य का मास्टर प्लान तैयार कर रही है। ग्रामीणों से उनकी राय ली जा रही है और गांवों की भविष्य की जरूरतों व समस्याओं को चिन्हित किया जा रहा है, ताकि विकास का मजबूत रोडमैप तैयार हो सके। इस प्रक्रिया में 298 बिदुओं पर बेसिक जानकारी और 198 बिदुओं पर ग्रामीणों से अपेक्षाएं पूछी जा रही हैं। विभागीय अधिकारी ग्राम सभाओं में पहुंचकर सुझाव ले रहे हैं, जिन्हें बाद में पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।
रवि वर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, बूंदी

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