600 दामाद, 3500 किलो आम और 7 हजार लीटर आमरस; क्या है महाराष्ट्र की दशकों पुरानी ये अनोखी परंपरा

600 दामाद, 3500 किलो आम और 7 हजार लीटर आमरस; क्या है महाराष्ट्र की दशकों पुरानी ये अनोखी परंपरा

हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला ‘अधिक मास’ शुरू हो चुका है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। इस पावन अवसर पर महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) शहर के पास स्थित प्रसिद्ध ‘श्रीक्षेत्र आगडगाव कालभैरवनाथ देवस्थान’ में एक अद्भुत और भव्य नजारा देखने को मिला। मंदिर प्रशासन की ओर से अधिक मास के पहले ही दिन एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 600 दामादों का किसी राजा-महाराजा की तरह शाही सत्कार किया गया। उन्हें पारंपरिक व्यंजनों का भव्य प्रसाद परोसा गया।

दामाद के लिए भव्य भोज

मंदिर परिसर में रविवार सुबह से ही भक्तों और मेहमानों की भारी भीड़ देखने को मिली। अधिक मास के पहले दिन आयोजित इस खास कार्यक्रम में महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से दामाद अपने परिवार के साथ पहुंचे थे।

3500 किलो आम से तैयार हुआ 7 हजार लीटर आमरस

देवस्थान ट्रस्ट की ओर से इस साल दामाद सत्कार कार्यक्रम के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई थी। 3500 किलो आम, 1000 लीटर दूध और एक टन चीनी मिलाकर करीब 7 हजार लीटर आमरस तैयार किया गया। इसके लिए 15 बड़े पातेलों में आमरस बनाया गया।

इसके अलावा 1000 किलो चने की दाल से पूरन पोली तैयार किया गया। दोपहर 12 बजे श्री कालभैरवनाथ की महाआरती के बाद महाप्रसाद वितरण शुरू हुआ।

मंदिर प्रशासन के अनुसार करीब 20 हजार श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था की गई थी। खास बात यह रही कि पूरा भोजन गांव की महिलाओं ने मिलकर तैयार किया।

दामादों का खास सम्मान, कुर्ता-पायजामा और पैठनी साड़ी भेंट

‘धोंडे जेवण’ की परंपरा में दामाद का विशेष सम्मान किया जाता है। इसी परंपरा के तहत मंदिर प्रशासन की ओर से आने वाले दामादों को कुर्ता-पायजामा भेंट किया गया, जबकि बेटियों को पैठनी साड़ी उपहार में दी गई। इस धार्मिक आयोजन में केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि विदेश से भी श्रद्धालु पहुंचे।

क्यों है बेहद खास?

हिंदू संस्कृति में अधिक मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है। इसे भगवान विष्णु का माह माना जाता है। इस दौरान बेटियों और दामादों को घर बुलाकर उनका विशेष सत्कार किया जाता है।

महाराष्ट्र के कई ग्रामीण इलाकों में दशकों से आज भी यह परंपरा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। परंपरा के अनुसार दामाद को मीठा भोजन कराया जाता है, जिसमें खास पकवान होता है। इसमें ‘धोंडे’ भी होता है, जो गेंहू या चावल के आटे में पूरन भरकर बनाए जाने वाला खास पकवान भी होता हैं।

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