महिलाओं की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के हर थाने में ऊर्जा महिला डेस्क स्थापित किए हैं। इन डेस्क पर 24 घंटे महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का दावा किया जाता है, ताकि पीड़ित महिलाएं बिना डर अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, लेकिन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। ताजा मामला जबलपुर जिले के कुंडम थाने का है, जहां महिलाओं के लिए ऊर्जा महिला डेस्क की बिल्डिंग तो बना दी गई, लेकिन यहां नियमित रूप से डेस्क संचालित ही नहीं हो रहा। हालत यह है कि थाने में महिला पुलिसकर्मी तक तैनात नहीं हैं। घंटों थाने में बैठी रही पीड़िता स्थानीय लोगों के मुताबिक हाल ही में दुष्कर्म की शिकार एक महिला रिपोर्ट दर्ज कराने कुंडम थाने पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उससे कहा कि थाने में फिलहाल कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं है, इसलिए बाद में आना। पीड़िता घंटों तक थाने में बैठी रही, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। आखिरकार वह बिना रिपोर्ट लिखवाए ही अपने गांव लौट गई। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत स्थानीय विधायक संतोष बरकड़े से की। विधायक ने मामले को गंभीर बताते हुए आश्वासन दिया कि जल्द ही ऊर्जा महिला डेस्क को 24 घंटे संचालित कराया जाएगा और महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी। जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित कुंडम थाना आदिवासी क्षेत्र में आता है। यहां दूर-दराज के गांवों से महिलाएं न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचती हैं, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति के कारण उनकी शिकायतें तक दर्ज नहीं हो पा रहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई महिलाएं केवल इसलिए वापस लौट जाती हैं क्योंकि थाने में उनकी बात सुनने के लिए महिला अधिकारी मौजूद नहीं रहती। क्या है ऊर्जा महिला डेस्क? राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया ऊर्जा महिला डेस्क पुलिस थानों में महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों की शिकायतों के लिए विशेष व्यवस्था है। इसका उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनना, तत्काल कार्रवाई करना और पीड़ितों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है, लेकिन कुंडम थाने की स्थिति इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। प्रमुख जिम्मेदारियों और कार्यों में शामिल हैं: सुलभ सुनवाई: थाने में आने वाली महिला फरियादियों की शिकायतों को बिना किसी झिझक के, एक अलग और सुरक्षित वातावरण में धैर्यपूर्वक सुनना। महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती: इस डेस्क का संचालन विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला अधिकारियों/ कर्मचारियों (जैसे महिला एसआई या एएसआई) द्वारा किया जाता है। समग्र सहायता (वन-स्टॉप सॉल्यूशन): महिलाओं को पुलिस सुरक्षा के अलावा विधिक सहायता, चिकित्सा और महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं का लाभ एक ही जगह पर दिलाने में मदद करना। जागरूकता अभियान: महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, ‘गुड टच-बैड टच’, और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करना। त्वरित कार्रवाई: घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, और लैंगिक अपराधों जैसे मामलों में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करना।।


