Investment Tips: जानिए क्या है ‘100 Minus Age’ का फॉर्मूला, जो आपकी उम्र के हिसाब से कराएगा कमाई!

Investment Tips: जानिए क्या है ‘100 Minus Age’ का फॉर्मूला, जो आपकी उम्र के हिसाब से कराएगा कमाई!

100 Minus Age Rule: बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा सुरक्षित रहे और उसे बेहतरीन रिटर्न भी मिले। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में अमीर बनने के लिए आपके पैसों का सही जगह निवेश सबसे जरूरी है। इसलिए निवेशकों को इक्विटी, सोना और दूसरी एसेट क्लास में अपने निवेश को बांटना चाहिए। साथ ही किस क्षेत्र में कितना निवेश करना चाहिए, यह उम्र, फाइनेंशियल लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से भी तय करना चाहिए।

क्या कहता है 100-उम्र का नियम

फाइनेंशियल प्लानर पूनम रुंगटा के अनुसार, 100-उम्र फॉर्मूले का इस्तेमाल करके यह तय कर सकते हैं कि निवेशेकों को कितनी रकम शेयर बाजार (Equity) में लगानी चाहिए और कितनी रकम सुरक्षित निवेश करनी चाहिए। इसके लिए आपको बस 100 में से अपनी मौजूदा उम्र को घटाना होगा। जो नंबर आएगा, उतने प्रतिशत रकम आप इक्विटी यानी शेयर बाजार में लगा सकते हैं।

उदाहरण के लिए मान लें कि आपकी उम्र 30 साल है, तो (100−30=70) यानी आपको अपने कुल निवेश का 70 फीसदी हिस्सा शेयर बाजार में लगाना चाहिए। वहीं, अगर आपकी उम्र 60 साल है, तो (100−60=40) यानी आपको शेयर बाजार में सिर्फ 40 फीसदी निवेश करना चाहिए और बाकी पैसा सुरक्षित जगहों पर रखना चाहिए।

100 Minus Age Rule
100 Minus Age Rule

इसके पीछे सीधा तर्क यह है कि कम उम्र के युवाओं के पास जोखिम उठाने और बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए लंबा समय होता है। वहीं, रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके बुजुर्गों को अपनी पूंजी सुरक्षित रखने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग और अन्य रणनीतियां

ऑप्टिमा मनी के एमडी पंकज मठपाल बताते हैं कि एसेट एलोकेशन के साथ-साथ ‘रीबैलेंसिंग’ भी बहुत जरूरी है। मान लीजिए आपने तय किया कि आप 60 फीसदी पैसा इक्विटी में और 40 फीसदी डेट या गोल्ड में रखेंगे। अगर शेयर बाजार बढ़ने से आपका इक्विटी हिस्सा 70 फीसदी हो जाता है, तो आपको मुनाफावसूली करके उसे वापस 60 फीसदी पर लाना चाहिए। इससे लालच या डर में आकर गलत फैसले लेने से बचाव होता है।

बाजार की स्थिति को देखकर फैसला लें

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ निवेशक बेहतर रिटर्न पाने के लिए Tactical Asset Allocation रणनीति अपनाते हैं। इसमें वे बाजार की स्थिति देखकर कुछ समय के लिए उन सेक्टर्स में ज्यादा निवेश करते हैं, जिनमें तेजी की संभावना होती है, जैसे डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग, PSU या गोल्ड फंड। हालांकि, यह रणनीति काफी जोखिम भरी मानी जाती है, क्योंकि इसमें सही समय पर खरीद और बिक्री करना बहुत जरूरी होता है। गलत समय पर निवेश करने से नुकसान भी हो सकता है।

पोर्टफोलियो मैनेज नहीं करना तो यह करें

जो निवेशक बार-बार अपने पोर्टफोलियो को मैनेज नहीं करना चाहते, उनके लिए एक्सपर्ट्स डायनामिक एसेट एलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स को बेहतर विकल्प मानते हैं। ये फंड बाजार की स्थिति के हिसाब से अपने आप इक्विटी और डेट में निवेश का अनुपात बदलते रहते हैं।

इसके अलावा एक्सपर्ट्स कोर और सैटेलाइट पोर्टफोलियो रणनीति की भी सलाह देते हैं, जिसमें 70 से 80 फीसदी पैसा सुरक्षित और लंबे समय वाले निवेश में रखा जाता है। जबकि 20 से 30 फीसदी हिस्सा ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों जैसे स्मॉलकैप, सेक्टर फंड या बिजनेस साइकिल थीम में लगाया जाता है।

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