ईरान के आगे झुकने को मजबूर हुए यूरोपियन देश, हॉर्मुज से अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए मांगा परमिशन

ईरान के आगे झुकने को मजबूर हुए यूरोपियन देश, हॉर्मुज से अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए मांगा परमिशन

दुनिया के सबसे अहम तेल रास्ते पर ईरान की पकड़ मजबूत होती जा रही है। चीन, जापान और पाकिस्तान के जहाज बिना किसी परेशानी के गुजर चुके हैं, लेकिन अब यूरोपीय देशों भी इस रास्ते से अपना जहाज सुरक्षित निकालना चाहते हैं।

वे भी ईरान की नौसेना से मंजूरी मांग रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि इस वक्त हॉर्मुज स्ट्रेट पर को लेकर यूरोपियन देश भी ईरान के आगे झुकने को मजबूर हो गए हैं।

तनाव का माहौल और ईरान की रणनीति

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने हॉर्मुज पर सख्ती बढ़ा दी है। अमेरिका और उसके सहयोगियों को छोड़कर बाकी देशों के लिए रास्ता खुला रखने की बात कही गई, लेकिन हर जहाज को ईरानी नौसेना की अनुमति लेनी पड़ रही है।

इस स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, इसलिए इसकी बंदिश से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। पाकिस्तान का एक तेल टैंकर कराची सफलतापूर्वक गुजर चुका है।

चीन ने भी अपने कई जहाज भेजे और वे सुरक्षित निकल गए। जापान के जहाज भी अनुमति लेकर गुजरे। इन देशों के साथ ईरान के अच्छे संबंध हैं, इसलिए उन्हें आसानी हुई।

यूरोपीय देश क्यों कर रहे गुहार?

फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देश अब ईरान से बातचीत कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनके जहाज भी बिना रुकावट के गुजर सकें। ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये देश ईरान के साथ सीधी बात कर रहे हैं।

जर्मनी, नीदरलैंड और ब्रिटेन जैसे देश भी चिंतित हैं क्योंकि उनका तेल और व्यापार इस रास्ते पर निर्भर है। ईरान कह रहा है कि जो देश उसके खिलाफ नहीं हैं, उन्हें रास्ता मिल सकता है। लेकिन अमेरिका या इजराइल से जुड़े जहाजों पर सख्ती बरती जा रही है। इस वजह से कई जहाज फंस गए हैं और तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

संकट में ईरान को फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान इस संकट को अपने फायदे में इस्तेमाल कर रहा है। वह न सिर्फ राजनीतिक दबाव बना रहा है बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था के लिए भी नया रास्ता तलाश रहा है। कुछ खबरों में कहा गया है कि ईरान अब इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कुछ फीस भी लगाने की योजना बना रहा है।

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