Geopolitics : दुनिया की नजरें इस समय दो अलग-अलग बड़ी घटनाओं पर टिकी हैं, जिनका असर सीधे तौर पर वैश्विक राजनीति पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के अहम दौरे पर हैं और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से गंभीर मुद्दों पर मुलाकात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूरोप में तबाही का खौफनाक मंजर जारी है। इसी मुलाकात के बीच रूस ने अचानक यूक्रेन पर अपने हमले बेहद तेज कर दिए हैं। गुरुवार को यूक्रेन के कई शहरों पर रूस ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइलों से कहर बरपाया, जिससे भारी तबाही हुई है।
रूसी सेना ने आसमान से एक के बाद एक कई घातक मिसाइलें दागीं
ध्यान रहे कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध रुकने और शांति की उम्मीदें की जा रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी सेना ने आसमान से एक के बाद एक कई घातक मिसाइलें दागीं। इस भीषण बमबारी से यूक्रेन के विभिन्न इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढांचों को खासतौर पर निशाना बनाया गया है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग अपनी जान बचाने के लिए बंकरों और सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं, और हर तरफ दहशत का माहौल है।
कूटनीतिक गलियारों में अचानक सरगर्मी बढ़ गई
भू-राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि रूस का यह आक्रामक कदम दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश हो सकता है। जब दुनिया के दो सबसे ताकतवर देशों के नेता’ट्रंप और जिनपिंग‘एक साथ बैठक कर रहे हों, ठीक उसी वक्त व्लादिमीर पुतिन का यह आक्रामक रुख कई नए सवाल खड़े करता है। यह हमला दर्शाता है कि रूस अपने सैन्य अभियानों में किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव को मानने के लिए तैयार नहीं है। इस कार्रवाई ने कूटनीतिक गलियारों में अचानक सरगर्मी बढ़ा दी है।
तबाही को पूरी तरह से टाला नहीं जा सका
यूक्रेन ने भी इस भयानक हमले के बीच अपना बचाव करते हुए कड़ा संघर्ष किया है। यूक्रेन की सेना और वायु रक्षा तंत्र ने हवा में ही कई रूसी ड्रोन्स को मार गिराने का दावा किया है। हालांकि, हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तबाही को पूरी तरह से टाला नहीं जा सका। इसे हाल के दिनों में रूस का सबसे बड़ा और सुनियोजित प्रहार माना जा रहा है।
यूक्रेन ने आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की मांग की
यूक्रेन ने इस हमले को पूरी तरह से अमानवीय बताते हुए पश्चिमी देशों और अमेरिका से तत्काल आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और यूरोपीय देशों ने भी रूस के इस कदम की कड़ी निंदा की है, इसे शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों पर एक बड़ा प्रहार बताया है।
ट्रंप और जिनपिंग के साझा बयान पर रहेंगी नजरें
इस हमले के बाद अब सभी की नजरें ट्रंप और जिनपिंग के साझा बयान पर रहेंगी। क्या दोनों देश रूस पर कोई दबाव बनाने की पहल करेंगे? इसके अलावा, नाटो देशों की आपातकालीन बैठक भी जल्द बुलाई जा सकती है, जिसमें यूक्रेन को दी जाने वाली अगली सैन्य मदद पर मुहर लग सकती है। इस भीषण युद्ध का असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। इन हमलों के कारण वैश्विक शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में घबराहट फैल गई है।


