कैसे रुकेगी गड़बड़ी:नीट यूजी : माफियाओं की पहुंच प्रिंटिंग प्रेस और वेयर हाउस तक

कैसे रुकेगी गड़बड़ी:नीट यूजी : माफियाओं की पहुंच प्रिंटिंग प्रेस और वेयर हाउस तक

पेपरलीक की आशंका की वजह से नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई। अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। नीट यूजी 2024 पेपरलीक मामले की जांच भी सीबीआई ही कर रही है। नीट 2024 पेपरलीक मामले में करीब 43 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कुछ आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है। इस मामले के दो साल बीत जाने के बाद भी अबतक आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन लंबित है। इधर कुछ आरोपियों ने सीबीआई कोर्ट में आरोपों से विमुक्त करने का आवेदन भी दिया है। बिहार में हाल के कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपरलीक हुआ है। जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारी आई है। नीट यूजी का पेपरलीक करने और अभ्यर्थियों से सौदा करने में परीक्षा माफिया सालभर लगे रहते हैं। माफियाओं को जानकारी रहती है कि पेपर कहां-कहां छपते हैं। वे यह भी पता लगा लेते हैं कि किस ट्रांसपोर्ट एजेंसी से पेपर को संबंधित राज्यों के वेयर हाउस में ले जाना है। चार्जशीट में खुलासा : पेपरलीक करने अहमदाबाद गया था संजीव मुखिया : बिहार में अक्टूबर 2023 में हुए सिपाही बहाली पेपरलीक मामले में ईओयू ने अगस्त 2024 में संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव, भतीजे अश्विनी रंजन उर्फ सोनू सहित अन्य को उज्जैन से गिरफ्तार किया था। अश्विनी रंजन के खिलाफ ईओयू चार्जशीट भी कर चुकी है। इसमें अश्विनी का बयान है-संजीव अंकल के साथ नीट 2024 का प्रश्नपत्र लीक करने सूर्या प्रेस और टीसीआई एक्सप्रेस का पता लगाने अहमदाबाद गए थे। यूपी के परीक्षा माफिया रवि अत्री ने संजीव अंकल को हरियाणा नंबर (एचआर16डब्ल्यू-7223) की किया सेलटॉस कार उपलब्ध कराई थी। वहीं इन दोनों ने प्रेस और लॉजिस्टिक कंपनी के कई कर्मियों से बातचीत भी की। रवि अत्री और संजीव मुखिया के बीच बातचीत की रिकार्डिंग भी सोनू ने ईओयू को उपलब्ध कराई थी। नीट यूजी के पेपर दो प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं और माफियाओं को दोनों प्रेस की जानकारी है। नीट यूजी 2024 : सीबीआई ने चार्जशीट नहीं की तो संजीव मुखिया को मिल गई थी जमानत संजीव मुखिया को बिहार की ईओयू ने 2023 में हुए सिपाही बहाली पेपरलीक मामले में 26 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। सिपाही बहाली पेपरलीक के बाद से संजीव फरार चल रहा था। 2025 में वह नीट की परीक्षा में धांधली करने के फिराक में पटना आया और पकड़ा गया। इधर नीट यूजी 2024 पेपरलीक मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। सीबीआई ने संजीव मुखिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। लेकिन, सीबीआई ने संजीव मुखिया के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसके बाद संजीव मुखिया के वकील ने सीबीआई कोर्ट पटना में आवेदन दाखिल किया कि वह 90 दिन से न्यायिक हिरासत में हैं, लेकिन सीबीआई ने अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। इसके बाद अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 का लाभ देते हुए संजीव को जमानत दे दी। हालांकि वह सिपाही बहाली पेपरलीक सहित अन्य मामलों में जेल में बंद है। नीट यूजी 2026 की परीक्षा से करीब एक हफ्ता पहले उसे पटना के बेउर जेल से बक्सर जेल भेज दिया गया था। बड़ा सवाल : माफियाओं तक कैसे पहुंचती है गोपनीय जानकारी परीक्षा माफियाओं को इस बात की जानकारी होती है कि पेपर कहां छपेंगे, ट्रांसपोर्टर कौन है, किस जिले के किस वेयर हाउस में प्रिंटिंग प्रेस से लाकर रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य लॉजिस्टिक की जानकारी माफियाओं के पास होती है। जबकि, यह जानकारी अत्यंत गोपनीय होती है। यह परीक्षा से जुड़े कुछ ही लोगों के पास होती है। गिरोह सबसे पहले इन्हीं जानकारियों को हासिल करता है और पेपर लीक करता है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन माफियाओं तक यह गोपनीय जानकारी कैसे पहुंचती है? नीट 2026 : बिहार में 60 लाख में डील, 2 लाख एडवांस नीट यूजी 2026 की परीक्षा में बिहार में नकल कराने के लिए अभ्यर्थियों से 60 लाख में सौदा किया गया था। 2 लाख एडवांस लिया था। हालांकि नालंदा पुलिस ने इस साजिश को नाकाम कर दिया था। इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड विम्स मेडिकल कॉलेज, पावापुरी का एमबीबीएस छात्र अवधेश कुमार है। पुलिस ने अबतक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। जेल जाने वालों में सीतामढ़ी का हर्षराज, मुजफ्फरपुर का मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार भी है। सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह में उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह की अहम भूमिका है। सीबीआई इस केस से जुड़े सारे कागजात नालंदा पुलिस से लेकर आगे की जांच करेगी। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई को हुई थी। बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को उस दिन हर हाल में कॉलेज आने को कहा था। हालांकि उस दिन रविवार था। ऐसा आदेश इसलिए जारी किया गया था कि एमबीबीएस के छात्र कहीं सॉल्वर बनकर नकल कराने न लगें। पेपरलीक की आशंका की वजह से नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई। अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। नीट यूजी 2024 पेपरलीक मामले की जांच भी सीबीआई ही कर रही है। नीट 2024 पेपरलीक मामले में करीब 43 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कुछ आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है। इस मामले के दो साल बीत जाने के बाद भी अबतक आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन लंबित है। इधर कुछ आरोपियों ने सीबीआई कोर्ट में आरोपों से विमुक्त करने का आवेदन भी दिया है। बिहार में हाल के कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपरलीक हुआ है। जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारी आई है। नीट यूजी का पेपरलीक करने और अभ्यर्थियों से सौदा करने में परीक्षा माफिया सालभर लगे रहते हैं। माफियाओं को जानकारी रहती है कि पेपर कहां-कहां छपते हैं। वे यह भी पता लगा लेते हैं कि किस ट्रांसपोर्ट एजेंसी से पेपर को संबंधित राज्यों के वेयर हाउस में ले जाना है। चार्जशीट में खुलासा : पेपरलीक करने अहमदाबाद गया था संजीव मुखिया : बिहार में अक्टूबर 2023 में हुए सिपाही बहाली पेपरलीक मामले में ईओयू ने अगस्त 2024 में संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव, भतीजे अश्विनी रंजन उर्फ सोनू सहित अन्य को उज्जैन से गिरफ्तार किया था। अश्विनी रंजन के खिलाफ ईओयू चार्जशीट भी कर चुकी है। इसमें अश्विनी का बयान है-संजीव अंकल के साथ नीट 2024 का प्रश्नपत्र लीक करने सूर्या प्रेस और टीसीआई एक्सप्रेस का पता लगाने अहमदाबाद गए थे। यूपी के परीक्षा माफिया रवि अत्री ने संजीव अंकल को हरियाणा नंबर (एचआर16डब्ल्यू-7223) की किया सेलटॉस कार उपलब्ध कराई थी। वहीं इन दोनों ने प्रेस और लॉजिस्टिक कंपनी के कई कर्मियों से बातचीत भी की। रवि अत्री और संजीव मुखिया के बीच बातचीत की रिकार्डिंग भी सोनू ने ईओयू को उपलब्ध कराई थी। नीट यूजी के पेपर दो प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं और माफियाओं को दोनों प्रेस की जानकारी है। नीट यूजी 2024 : सीबीआई ने चार्जशीट नहीं की तो संजीव मुखिया को मिल गई थी जमानत संजीव मुखिया को बिहार की ईओयू ने 2023 में हुए सिपाही बहाली पेपरलीक मामले में 26 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। सिपाही बहाली पेपरलीक के बाद से संजीव फरार चल रहा था। 2025 में वह नीट की परीक्षा में धांधली करने के फिराक में पटना आया और पकड़ा गया। इधर नीट यूजी 2024 पेपरलीक मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। सीबीआई ने संजीव मुखिया को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। लेकिन, सीबीआई ने संजीव मुखिया के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसके बाद संजीव मुखिया के वकील ने सीबीआई कोर्ट पटना में आवेदन दाखिल किया कि वह 90 दिन से न्यायिक हिरासत में हैं, लेकिन सीबीआई ने अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। इसके बाद अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 का लाभ देते हुए संजीव को जमानत दे दी। हालांकि वह सिपाही बहाली पेपरलीक सहित अन्य मामलों में जेल में बंद है। नीट यूजी 2026 की परीक्षा से करीब एक हफ्ता पहले उसे पटना के बेउर जेल से बक्सर जेल भेज दिया गया था। बड़ा सवाल : माफियाओं तक कैसे पहुंचती है गोपनीय जानकारी परीक्षा माफियाओं को इस बात की जानकारी होती है कि पेपर कहां छपेंगे, ट्रांसपोर्टर कौन है, किस जिले के किस वेयर हाउस में प्रिंटिंग प्रेस से लाकर रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य लॉजिस्टिक की जानकारी माफियाओं के पास होती है। जबकि, यह जानकारी अत्यंत गोपनीय होती है। यह परीक्षा से जुड़े कुछ ही लोगों के पास होती है। गिरोह सबसे पहले इन्हीं जानकारियों को हासिल करता है और पेपर लीक करता है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन माफियाओं तक यह गोपनीय जानकारी कैसे पहुंचती है? नीट 2026 : बिहार में 60 लाख में डील, 2 लाख एडवांस नीट यूजी 2026 की परीक्षा में बिहार में नकल कराने के लिए अभ्यर्थियों से 60 लाख में सौदा किया गया था। 2 लाख एडवांस लिया था। हालांकि नालंदा पुलिस ने इस साजिश को नाकाम कर दिया था। इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड विम्स मेडिकल कॉलेज, पावापुरी का एमबीबीएस छात्र अवधेश कुमार है। पुलिस ने अबतक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। जेल जाने वालों में सीतामढ़ी का हर्षराज, मुजफ्फरपुर का मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार भी है। सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह में उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह की अहम भूमिका है। सीबीआई इस केस से जुड़े सारे कागजात नालंदा पुलिस से लेकर आगे की जांच करेगी। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई को हुई थी। बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को उस दिन हर हाल में कॉलेज आने को कहा था। हालांकि उस दिन रविवार था। ऐसा आदेश इसलिए जारी किया गया था कि एमबीबीएस के छात्र कहीं सॉल्वर बनकर नकल कराने न लगें।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *